नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) कर्मचारियों के एक संघ ने केंद्र से सरकार और उसके कर्मचारियों के बीच संवाद मंच ‘संयुक्त परामर्श तंत्र’ को मौजूदा प्रशासनिक वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने के लिए पुनर्गठित करने का आग्रह किया है।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय जन सेवा कर्मचारी महासंघ ने इस मांग को लेकर कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है। यह संघ केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य संगठनों के 13 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है।
पत्र में महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल ने कहा कि संयुक्त परामर्श तंत्र की प्रतिनिधित्व संरचना 1960 के दशक में तैयार की गई थी, जब भारत सरकार लगभग 35 से 45 मंत्रालयों और अपेक्षाकृत सीमित प्रशासनिक ढांचे के माध्यम से काम करती थी।
उन्होंने कहा कि अब केंद्र सरकार 50 से अधिक मंत्रालयों के साथ-साथ कई विभागों, स्वायत्त संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, शोध संगठनों, तकनीकी निकायों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के माध्यम से कार्य करती है।
पटेल ने कहा, ‘‘इस बड़े विस्तार के बावजूद, संयुक्त परामर्श तंत्र की प्रतिनिधित्व संरचना अब भी 1966 के ढांचे पर काफी हद तक टिकी हुई है।’’
उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप कई मंत्रालयों, क्षेत्रों और केंद्र शासित प्रशासनिक तंत्रों को मौजूदा संयुक्त परामर्श तंत्र ढांचे में या तो बेहद कम प्रतिनिधित्व मिलता है या बिल्कुल नहीं मिलता।
पटेल ने मंत्री जितेंद्र सिंह और कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन दोनों को लिखे पत्र में कहा, ‘‘महासंघ सरकार से अनुरोध करता है कि वह मौजूदा शासन वास्तविकताओं और प्रशासनिक विस्तार के अनुसार संयुक्त परामर्श तंत्र की संरचना का विस्तार और पुनर्गठन करने पर विचार करे।’’
भाषा खारी वैभव
वैभव