श्रीनगर, 26 मई (भाषा) कश्मीर के धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने मंगलवार को दावा किया कि अफसरों ने उन्हें बडगाम जिले में बलात्कार और हत्या की पीड़ित 12 वर्षीय बच्ची के परिवार से मिलने की अनुमति नहीं दी और घर में नजरबंद कर दिया गया।
मीरवाइज ने कहा कि बडगाम जाने की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद आज सुबह उन्हें घर में नजरबंद कर दिया गया।
बडगाम जिले में एक बच्ची से बलात्कार और उसकी हत्या के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लड़की शनिवार शाम को लापता हो गई थी और रविवार को उसका शव उसके घर से लगभग 200 मीटर दूर मिला।
मीरवाइज ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मुझे बडगाम जाने की इजाजत नहीं देने के बाद आज सुबह घर में नजरबंद कर दिया गया (मेरी सभी यात्राएं अधिकारियों की अनुमति पर निर्भर करती हैं, जिन्हें एक दिन पहले सूचित करना होता है)। मुझे उस क्रूर और भयावह घटना में अपनी 12 वर्षीय बच्ची को खोने वाले शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने और उनके दुख में शामिल होने के लिए वहां जाना था।’
मीरवाइज ने कहा कि यह विचित्र है कि पीड़ित परिवार के प्रति सहानुभूति और संवेदना व्यक्त करने जैसा एक बुनियादी मानवीय कार्य भी ‘शासकों और उनके ‘शांति और सामान्य स्थिति’ के आशय को खतरे में डालता है।’
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मीरवाइज को नजरबंद करने का कोई औचित्य नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मीरवाइज साहब को नजरबंद करने और उन्हें बडगाम में पीड़िता के परिवार से मिलने से रोकने की बिना सोचे-समझे की गई इस कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं है। पूरा कश्मीर इस घटना के बाद शोक में है। उन्हें बार-बार जामा मस्जिद में नमाज अदा नहीं करने देने और अब उन्हें एकजुटता व्यक्त करने जैसे साधारण मानवीय कार्य से वंचित करना बेहद क्रूर है।’’
भाषा अमित पवनेश
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