कोच्चि, 25 जुलाई (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोच्चि स्थित कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) से जुड़े धन शोधन मामले में न्याय निर्णयन प्राधिकरण के समक्ष दाखिल अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक (एमडी) ने स्वीकार किया है कि केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से पारिवारिक संबंधों के कारण वीणा टी. को भुगतान किया गया था।
यह जांच इन आरोपों से संबंधित है कि सीएमआरएल ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी वीणा टी. के स्वामित्व वाली कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जबकि बदले में कंपनी को कोई सेवा प्राप्त नहीं हुई।
ईडी ने मामले में आरोपियों की संपत्तियां कुर्क करने की मांग करते हुए यह रिपोर्ट प्राधिकरण के समक्ष दाखिल की है।
रिपोर्ट के अनुसार, सीएमआरएल के संस्थापक और पूर्व प्रबंध निदेशक एस. एन. ससीधरन कार्था का कंपनी पर पूर्ण नियंत्रण था और उन्होंने 15 वर्षों में 182 करोड़ रुपये के कथित गबन के लिए एक बहुस्तरीय योजना तैयार की।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इस योजना के तहत ‘स्लज हैंडलिंग एंड ट्रांसपोर्टेशन एक्सपेंसेज’ के नाम पर 139 करोड़ रुपये के फर्जी नकद खर्च स्वयं तैयार किए गए वाउचरों के जरिए दर्ज किए गए, जिनके समर्थन में कोई बिल पेश नहीं किया गया।
इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि 43 करोड़ रुपये चुनिंदा विक्रेताओं द्वारा कथित रूप से बढ़े-चढ़े बिल जारी कर निकाल लिए गए। आरोप है कि विक्रेता अतिरिक्त राशि नकद निकालकर अपना कमीशन काटने के बाद शेष रकम सीएमआरएल के अधिकारियों को लौटा देते थे।
ईडी का आरोप है कि 2.78 करोड़ रुपये के फर्जी खर्च सॉफ्टवेयर सेवाओं के नाम पर दर्ज किए गए और यह राशि वीणा तथा उनकी कंपनी एक्सालॉजिक को दी गई, जबकि उन्होंने सीएमआरएल को कोई सेवा प्रदान नहीं की।
रिपोर्ट में, 17 अप्रैल 2024 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 50 के तहत दर्ज कार्था के बयान का जिक्र करते हुए कहा गया कि उन्होंने स्वीकार किया कि धनराशि विक्रेताओं को भेजी जाती थी, जो उसे नकद निकालकर बिना किसी वास्तविक खर्च के उन्हें या उनके सहयोगियों को लौटा देते थे।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘उन्होंने स्वीकार किया कि वीणा और एक्सालॉजिक को बिना कोई सेवा दिए भुगतान किया गया, जिसका कारण उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों को बताया।’’
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘वीणा आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं के नाम पर प्राप्त 2.78 करोड़ रुपये के बदले सीएमआरएल के लिए किए गए किसी भी ठोस (वास्तविक) कार्य का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकीं।’’
ईडी ने आरोप लगाया कि एक्सालॉजिक की वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर थी। कंपनी की 66 लाख रुपये की नकारात्मक शुद्ध हैसियत थी और उसका स्वतंत्र कारोबार केवल पांच लाख रुपये था। ऐसे में उसका वित्तीय अस्तित्व लगभग पूरी तरह सीएमआरएल से प्राप्त धन पर निर्भर था।
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि कार्था के स्वामित्व और संचालन वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी एम्पावर इंडिया कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड ने एक्सालॉजिक को कुल 50 लाख रुपये का ऋण दिया था।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ सामान्य व्यावसायिक शर्तों के अनुसार ऋण का भुगतान न करने के बावजूद बैंक खातों के विवरण से पता चलता है कि सीएमआरएल से प्राप्त धनराशि को सीधे आरटीजीएस ट्रांसफर के माध्यम से एक्सालॉजिक के खाते से निकाल लिया गया।’’
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘वीणा और सीएमआरएल के प्रबंध निदेशक के बीच ईमेल पत्राचार मुख्य रूप से इनवॉइस तैयार करने और भुगतान की प्रक्रिया पर केंद्रित था, न कि वास्तविक आईटी सेवाएं प्रदान करने पर।’’
ईडी ने बताया कि वीणा के आवास से जब्त की गई वस्तुओं में एक आईफोन 14 प्रो मैक्स, लाल कवर वाली एक डायरी (पृष्ठ 1 से 9 तक) और एक ए-4 आकार का कागज शामिल है।
ईडी के अनुसार, ये डिजिटल और भौतिक दस्तावेज सीएमआरएल, एक्सालॉजिक और वीणा के बीच कथित फर्जी आईटी कंसल्टेंसी और मार्केटिंग सेवा अनुबंधों की वास्तविक शर्तों का पता लगाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
शनिवार को पत्रकारों द्वारा इस संबंध में पूछे जाने पर वीणा के पति और विधायक पी. ए. मोहम्मद रियास ने टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, ‘जो बात मुझे नहीं पता, उस पर मैं कुछ नहीं कह सकता। हम जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। इससे अधिक कुछ नहीं कहा जा सकता।’’
यह मामला ईडी ने गंभीर कपट जांच कार्यालय द्वारा कोच्चि की अदालत में दायर अभियोजन शिकायत के आधार पर पीएमएलए के तहत दर्ज किया था।
भाषा शोभना सुभाष
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