रिश्वतखोरी मामले में पूर्व ग्राम सहायक को चार साल की सजा

रिश्वतखोरी मामले में पूर्व ग्राम सहायक को चार साल की सजा

रिश्वतखोरी मामले में पूर्व ग्राम सहायक को चार साल की सजा
Modified Date: July 24, 2026 / 10:41 am IST
Published Date: July 24, 2026 10:41 am IST

कोझिकोड, 24 जुलाई (भाषा) कोझिकोड की एक सतर्कता अदालत ने भूमि अभिलेख (आरओआर) प्रमाणपत्र जारी करने के बदले रिश्वत लेने के मामले में एक पूर्व ग्राम सहायक को चार साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

सतर्कता अदालत के न्यायाधीश शिबू थॉमस ने बृहस्पतिवार को अलप्पुझा के अरूर निवासी और मलप्पुरम के कोडूर के पूर्व ग्राम सहायक एबी अनिल कुमार (58) को दोषी ठहराया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला 2018 का है, जब कोडूर निवासी एक व्यक्ति ने अपने दिवंगत पिता के नाम दर्ज पांच एकड़ जमीन के लिए भूमि अभिलेख (आरओआर) प्रमाणपत्र जारी करने का आवेदन स्थानीय ग्राम कार्यालय में किया था।

कुमार ने जमीन का निरीक्षण करने के बाद आरओआर प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें जारी करने के लिए 30,000 रुपये की रिश्वत मांगी और आवेदक से 10,000 रुपये अग्रिम के रूप में ले लिए।

इसके बाद आरोपी ने रात में अवैध रूप से कोडूर ग्राम कार्यालय में प्रवेश किया और ग्राम अधिकारी के आधिकारिक लॉगिन का इस्तेमाल कर सरकारी वेबसाइट के माध्यम से आरओआर प्रमाणपत्र तैयार किए। इसके बाद उसने दस्तावेजों पर सरकारी मुहर लगाकर ग्राम अधिकारी के हस्ताक्षर भी जाली बनाए।

बाद में मलप्पुरम सतर्कता इकाई ने आरोपी को उसके घर पर शिकायतकर्ता से फर्जी आरओआर प्रमाणपत्रों के बदले रिश्वत की बची हुई 15,000 रुपये की राशि लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

मलप्पुरम सतर्कता इकाई ने मामले की जांच पुलिस उपाधीक्षकों ए. रामचंद्रन और फिरोज एम. शफीक के नेतृत्व में की। जांच दल में निरीक्षक सी. यूसुफ, एम. गंगाधरन और रफीक भी शामिल थे।

भाषा तान्या सिम्मी

सिम्मी


लेखक के बारे में