मध्यस्थता प्रक्रिया की दक्षता को प्रभावित करता है अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप: संसदीय समिति

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मध्यस्थता प्रक्रिया की दक्षता को प्रभावित करता है अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप: संसदीय समिति

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 06:02 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 06:02 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) भारत को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का केंद्र बनाने के सरकार के प्रयासों के बीच संसद की एक समिति ने कहा है कि ‘‘अत्यधिक या असंगत’’ न्यायिक हस्तक्षेप मध्यस्थता प्रक्रिया की दक्षता को प्रभावित करता है।

समिति ने कहा कि इस तरह के हस्तक्षेप अक्सर उस प्रक्रिया में देरी करते हैं, जिसका उद्देश्य अदालतों में चलने वाले मुकदमों के मुकाबले विवादों का जल्द समाधान करना है।

विधि और कार्मिक संबंधी विभाग की स्थायी समिति ने संसद में पिछले सप्ताह पेश संस्थागत वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली (एडीआर) संबंधी नवीनतम रिपोर्ट में कहा, ‘‘निष्पक्षता और वैधानिकता सुनिश्चित करने के लिए अदालतों की कुछ हद तक निगरानी आवश्यक है, लेकिन बार-बार या टाले जा सकने वाले हस्तक्षेप से अत्यधिक देरी हो सकती है और मध्यस्थता प्रक्रिया की स्वतंत्रता भी कमजोर पड़ सकती है।’’

समिति ने देश के वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र के समक्ष ‘‘वैश्विक स्तर पर सीमित पहचान’’ को भी एक चुनौती के रूप में रेखांकित किया।

उसने इस समस्या के समाधान के लिए मध्यस्थता की कार्यवाही में निरंतर और एकसमान गुणवत्ता सुनिश्चित करने सहित कई उपाय सुझाए हैं।

सरकार भारत को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। ऐसे में समिति ने मध्यस्थता प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, स्वतंत्र और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है।

भाषा हक हक अविनाश

अविनाश