आबकारी मामला: सीबीआई की याचिका पर जवाब के लिए केजरीवाल, सिसोदिया को मिला अंतिम मौका

आबकारी मामला: सीबीआई की याचिका पर जवाब के लिए केजरीवाल, सिसोदिया को मिला अंतिम मौका

आबकारी मामला: सीबीआई की याचिका पर जवाब के लिए केजरीवाल, सिसोदिया को मिला अंतिम मौका
Modified Date: July 16, 2026 / 05:28 pm IST
Published Date: July 16, 2026 5:28 pm IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को अंतिम अवसर देते हुए उनसे दो सप्ताह के भीतर आबकारी नीति मामले में सीबीआई की याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की यह याचिका निचली अदालत द्वारा उन्हें आबकारी नीति मामले में आरोपमुक्त किए जाने के आदेश के खिलाफ है।

न्यायमूर्ति मनोज जैन ने उच्च न्यायालय के वकीलों द्वारा आहूत कार्य बहिष्कार के कारण आरोपमुक्त किए गए नेताओं की ओर से किसी के भी पेश नहीं होने पर सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई टाल दी। अदालत ने मामले में जांच एजेंसी की ओर से दलीलें सुनने के लिए 17 और 18 अगस्त की तारीख तय की।

सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि तीनों आप नेताओं को जवाब दाखिल करने के लिए पहले भी उच्च न्यायालय कई अवसर दे चुका है, लेकिन मामला अब तक लंबित है।

इस पर न्यायमूर्ति जैन ने कहा, ‘‘यदि मैं अगली तारीख दे रहा हूं, तो यह स्पष्ट कर दूंगा कि उन्हें जवाब दाखिल करने की स्वतंत्रता होगी।’’

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि आरोपमुक्त किए गए नेताओं की ओर से दलीलें सुनने के लिए भी एक निश्चित समय-सीमा तय की जाएगी।

मेहता ने अदालत से जुलाई के अंत या अगस्त की शुरुआत में सुनवाई की तारीख तय करने का अनुरोध करते हुए कहा कि निर्धारित तारीख ‘‘कुछ ज्यादा दूर’’ है।

हालांकि, न्यायमूर्ति जैन ने कहा कि उनकी अदालत में सांसदों और विधायकों से जुड़े कई अन्य मामले भी लंबित हैं, इसलिए सीबीआई के अनुरोध के अनुसार इससे पहले की तारीख देना संभव नहीं है।

हालांकि, न्यायमूर्ति जैन ने सॉलिसिटर जनरल को आश्वासन दिया कि वह मामले की पहले सुनवाई की संभावना पर दोबारा विचार करेंगे।

अदालत ने सभी पक्षों को अपनी लिखित दलीलें भी दाखिल करने का निर्देश दिया।

दिल्ली उच्च न्यायालय के वकील 14 जुलाई से काम का बहिष्कार कर रहे हैं। वे जिला अदालतों के आर्थिक अधिकार क्षेत्र को दो करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने की संभावित बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं।

केजरीवाल, सिसोदिया, पाठक और अन्य के खिलाफ अपने बारे में सोशल मीडिया पर ‘‘बदनाम करने वाली’’ पोस्ट करने के लिए अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू करने के बाद, न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने इस महीने की शुरुआत में आबकारी नीति मामले को अपनी पीठ से हटा दिया था, जिसके बाद यह मामला न्यायमूर्ति जैन के पास सुनवाई के लिए भेजा गया।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश


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