‘फर्जी’ हस्ताक्षर मामला: सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को पेश होने के लिए दूसरा समन जारी किया

‘फर्जी’ हस्ताक्षर मामला: सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को पेश होने के लिए दूसरा समन जारी किया

‘फर्जी’ हस्ताक्षर मामला: सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को पेश होने के लिए दूसरा समन जारी किया
Modified Date: June 1, 2026 / 10:38 pm IST
Published Date: June 1, 2026 10:38 pm IST

(तस्वीर के साथ)

कोलकाता, एक जून (भाषा)पश्चिम बंगाल सीआईडी ​​के जांचकर्ताओं ने हस्ताक्षर जालसाजी मामले के सिलसिले में कालीघाट इलाके में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के आवास पर 48 घंटे से कुछ अधिक समय में सोमवार शाम को दूसरी बार दौरा किया और आठ जून को जांचकर्ताओं के समक्ष पेश होने के लिए एक और समन सौंपा। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष को लिखे एक पत्र में पार्टी विधायकों के फर्जी हस्ताक्षरों के कथित इस्तेमाल के मामले में पूछताछ के लिए सीआईडी ​​मुख्यालय, भवानी भवन में पेश होने का निर्देश दिया गया है। उक्त पत्र में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) के रूप में चुने जाने का समर्थन किया गया था।

यह घटनाक्रम अभिषेक बनर्जी के सोमवार को सीआईडी ​​के समक्ष पेश होने नहीं होने के बाद किया। तृणमूल महासचिव ने एजेंसी द्वारा तलब किए जाने के बाद स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए दो सप्ताह का समय मांगा था।

बनर्जी के कार्यालय के एक कर्मचारी अयान घोष ने जांचकर्ताओं के जाने के बाद उनके आवास के बाहर संवाददाताओं को बताया, ‘‘दादा (अभिषेक बनर्जी) ने समन नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और उन्हें नोटिस मिल गया है। वे आगे की कार्रवाई पर फैसला करेंगे।’’

जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि सीआईडी ​​की टीम शाम करीब 5.30 बजे तृणमूल सांसद के आवास पर पहुंची और जांच के तहत परिसर के वीडियो रिकॉर्ड किए।

उन्होंने कहा, ‘‘परिसर का दस्तावेजीकरण करने और सबूत जुटाने के लिए वीडियोग्राफी की जा रही है। जांच कानून के अनुसार आगे बढ़ रही है। मामले से जुड़े आवश्यक बयान और सामग्री की जांच की जा रही है।’’

सीआईडी ​​ने 28 मई को कोलकाता पुलिस से कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। यह मामला हरे स्ट्रीट पुलिस थाने द्वारा राज्य विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोपों के तहत 27 मई को दर्ज किया गया था।

जांच एजेंसी ने अब तक इस मामले के संबंध में तृणमूल के 13 विधायकों से पूछताछ की है।

तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने 27 मई को विधानसभा अध्यक्ष रतींद्र बोस को सूचित किया कि पार्टी की छह मई की बैठक में नेता प्रतिपक्ष के चयन के संबंध में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था, जैसा कि विधानसभा अध्यक्ष को पार्टी के आधिकारिक पत्र में दावा किया गया था, और दोनों ने बैठक के प्रस्ताव पुस्तिका पर 19 मई को बाद में हस्ताक्षर किए थे। उनकी शिकायत के बाद यह मामला दर्ज किया गया।

दोनों विधायकों ने आरोप लगाया कि तथाकथित छह मई का प्रस्ताव ‘‘मनगढ़ंत और फर्जी’’ था और कहा कि 70 हस्ताक्षरों में से 14 हस्ताक्षर ‘‘बड़े अक्षरों’’ में थे।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा दोनों विधायकों के नाम सार्वजनिक रूप से उजागर करने के कुछ ही मिनटों बाद, सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने कथित ‘दल विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में दोनों विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर दिया।

सीआईडी ​​के अनुसार, तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव बनर्जी ने सबसे पहले नौ मई को बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष को सूचित किया था कि पार्टी ने चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उप नेता प्रतिपक्ष और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक के रूप में चुना है।

एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि अभिषेक बनर्जी ने 20 मई को विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजकर इस फैसले की जानकारी दी, जिसमें उन्होंने बैठक के संकल्प पुस्तिका की एक प्रति के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर छह मई को आयोजित बैठक में उपस्थित लगभग 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाली उपस्थिति पुस्तिका भी संलग्न की।

शुभेंदु अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘सीआईडी ​​द्वारा अब तक जिन 13 तृणमूल विधायकों के बयान दर्ज किए गए हैं, उनमें से तीन विधायकों – कैनिंग पूर्व के बहारुल इस्लाम, मध्य हावड़ा के अरूप रॉय और महेशतला के सुभाषिस दास – ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बैठक के प्रस्ताव पुस्तिका में हस्ताक्षर उनके नहीं हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कैनिंग पूर्व के विधायक ने यह भी कहा है कि वह छह मई को भांगर स्थित अपने आवास पर मौजूद थे और उन्होंने कोलकाता में किसी भी बैठक में भाग नहीं लिया।’’

सीआईडी ​​अधिकारियों ने बताया कि अभिषेक बनर्जी को छह मई की मूल बैठक प्रस्ताव पुस्तिका के साथ एक जून को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का नोटिस दिया गया था। हालांकि अभिषेक बनर्जी ने सोनारपुर की घटना के कारण खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अपने वकील के माध्यम से जांच अधिकारी को पत्र भेजकर दो सप्ताह का समय मांगा।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर शनिवार को तब हमला किया गया था जब वह दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में चुनाव बाद हिंसा के एक कथित पीड़ित के घर गए थे। उस शाम उन्होंने दो निजी अस्पतालों में उपचार कराया, जिस दौरान पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी भी मौजूद थीं।

भाषा धीरज माधव

माधव


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