नई दिल्लीः चुनाव आयोग पर आरोपों का सिलसिला सिर्फ राजधानी दिल्ली तक नहीं, बल्कि अलग अलग राज्यों में शुरु हो चुका है। मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ में भी चुनाव आयोग के बीच फूट को लेकर सियासी महाभारत शुरु हो गई है। SIR को लेकर उठे सवाल और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद ने अब सियासी पारा चढ़ा दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। विपक्ष इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
रिपोर्ट सामने आते ही विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मध्यप्रदेश में युवा कांग्रेस ने आयोग के दफ्तर का घेराव कर नारेबाजी की तो PCC चीफ जीतू पटवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने, FIR दर्ज करने और आंदोलन की चेतावनी दी। बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा- कांग्रेस के पास सबूत हैं तो सामने रखे। चुनाव जीतने पर EC अच्छा और हारने पर बुरा ये कांग्रेस का दोहरा चरित्र है। छत्तीसगढ़ में भी यही सियासी घमासान दिखा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने SIR के बाद हुए चुनावों को असंवैधानिक बताते हुए उन्हें रद्द करने की मांग कर दी। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त कर गिरफ्तारी की मांग की। बीजेपी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए सबूत मांग लिए।
अब इस विवाद में कॉकरोच जनता पार्टी की भी एंट्री हो गई है। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही इस्तीफा नहीं देने पर देशभर में आंदोलन की चेतावनी दी है। सवाल अब सिर्फ SIR पर उठ रहे सवालों का नहीं है। सवाल उस संस्था की साख का है, जिसके भरोसे देश अपने जनादेश की हिफाजत करता है, जब उसी चुनाव आयोग के भीतर से फैसलों पर आपत्तियों की आवाज उठे तो जवाबदेही किसकी होगी और क्या इन सवालों का जवाब सिर्फ सियासी बयानबाजी से मिलेगा? या देश की सर्वोच्च अदालत इस पर संज्ञान लेगी? एक रिपोर्ट से भड़की ये चिंगारी कहां कहां आग भड़काती है ये तो अभी वक्त बताएगा।