पैलेट गन मामले में प्राथमिकी दर्ज, राहुल का धरना समाप्त

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पैलेट गन मामले में प्राथमिकी दर्ज, राहुल का धरना समाप्त

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 07:48 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 07:48 PM IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के छह घंटे से अधिक समय तक चले धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन से घायल हुए युवक साहिल लोचब के मामले में प्राथमिकी दर्ज की।

इसके साथ ही, संसद मार्ग स्थित पुलिस उपायुक्त कार्यालय के बाहर राहुल गांधी का धरना समाप्त हो गया।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने प्राथमिकी दर्ज किए जाने को न्याय की दिशा में पहला कदम करार दिया और दावा किया कि न्याय की राह में ‘ब्रेक’ ऊपर से लगाया गया था तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं गृह सचिव गोविंद मोहन के स्तर पर ‘‘अंतिम मंजूरी’’ मिलने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।

दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘हमने भारतीय न्याय संहिता की धारा 118 (खतरनाक हथियारों या साधनों से जानबूझकर चोट पहुंचाना या गंभीर चोट पहुंचाना) और धारा 25 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।’’

लोचब के साथ गांधी सबसे पहले मंदिर मार्ग थाने गए थे और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।

इसके बाद वह प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए संसद मार्ग स्थित थाने पर पहुंचे और पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा से मुलाकात की। मांग नहीं माने जाने पर वह थाना परिसर स्थित डीसीपी कार्यालय के सामने वह धरने पर बैठ गए।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, जयराम रमेश, मुकुल वासनिक, कुमारी सैलजा, वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, अधीर रंजन चौधरी और कई अन्य नेता इस धरने में शामिल हुए।

धरना शुरू होने के बाद संसद मार्ग थाने के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘पैलेट गन का हिसाब दो, अमित शाह जवाब दो’ के नारे लगाए।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने यहां कुछ गलत नहीं किया। हमने सिर्फ एक भारतीय नागरिक, उसकी मां और पिता के लिए न्याय मांगा और इसमें आठ घंटे लग गए।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह थाना दिल्ली के बीचोंबीच स्थित है और अगर यहां न्याय मिलने में इतनी देर होती है तो गांव या छोटे शहरों के थानों में क्या स्थिति होती होगी, इसकी कल्पना की जा सकती है।

उन्होंने दावा किया कि प्राथमिकी दर्ज करने की अंतिम मंजूरी ‘‘गृह सचिव और अमित शाह’’ से मिलने के बाद ही प्राथमिकी दर्ज की गई।

राहुल गांधी ने कहा, ‘‘अब आप समझ सकते हैं कि प्राथमिकी दर्ज करने को कौन रोक रहा था।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी प्राथमिकी दर्ज करना चाहते थे और अन्य अधिकारी भी ऐसा करना चाहते थे, लेकिन ‘‘न्याय की राह में ब्रेक ऊपर से लगाया जा रहा था।’’

राहुल गांधी ने कहा कि मामले में प्राथिकी दर्ज होना न्याय की दिशा में पहला कदम है।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद साहिल ने कहा, ‘‘हाल ही में राहुल गांधी ने मेरे स्वास्थ्य के बारे में पूछने के लिए फोन किया था। मैंने उन्हें बताया कि मेरी प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा रही है। उन्होंने तुरंत कहा कि मिलते हैं, मैं खुद जाकर आपकी प्राथमिकी दर्ज करवाऊंगा।”

उन्होंन कहा, ‘‘मैं इतनी मदद और समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं। यह प्राथमिकी न्याय की दिशा में पहला कदम है। प्राथमिकी दर्ज कराने में आठ घंटे लग गए और शायद एलओपी के समर्थन के बिना यह दर्ज ही नहीं हो पाती।’’

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि इस मामले में अमित शाह ने दिल्ली पुलिस को प्राथमिकी दर्ज नहीं करने का निर्देश दिया था।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नेता राहुल गांधी पर संसद मार्ग थाना परिसर स्थित पुलिस उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना देकर ‘‘ओछी और अराजक राजनीति’’ करने का आरोप लगाया।

भाजपा ने आरोप लगाया कि यह ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है।

साहिल लोचब अपने वकीलों के साथ 14 अगस्त को दिल्ली पुलिस के पास गए थे और लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उन्हें जांच अधिकारी का नंबर नहीं दिया गया। इसके बाद 17 अगस्त को ईमेल और फोन के माध्यम से भी मामले को उठाया गया, लेकिन शिकायत की पावती नहीं दी गई और आईओ का संपर्क नंबर भी उपलब्ध नहीं कराया गया।

साहिल लोचब और उनके परिवार का आरोप है कि दिल्ली में छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई में पैलेट गन के छर्रे लगने से साहिल घायल हुए थे। राहुल गांधी ने जुलाई में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में साहिल लोचब को मीडिया के सामने पेश किया था।

साहिल की दाईं आंख में गंभीर चोट आई थी और उनके परिवार की ओर से दावा किया गया था कि चोट के कारण उनकी आंख की रोशनी जाने का खतरा है।

भाषा हक हक नरेश

नरेश