भ्रष्टाचार के मामले में डीजेबी के पूर्व सीईओ उदित राय समेत पांच आरोपियों को जमानत

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भ्रष्टाचार के मामले में डीजेबी के पूर्व सीईओ उदित राय समेत पांच आरोपियों को जमानत

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  • Publish Date - September 9, 2026 / 08:31 PM IST,
    Updated On - September 9, 2026 / 08:31 PM IST

नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) उदित प्रकाश राय समेत पांच आरोपियों को नियमित जमानत दे दी।

राउज एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने राय, डीजेबी के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव और नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा तथा पंकज वर्मा को जमानत दी।

अदालत ने कहा, ‘‘मामले में लगाए गए किसी भी आरोप के अंतिम गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना, पांचों आरोपियों की नियमित जमानत अर्जियां स्वीकार की जाती हैं।’’

अदालत ने पांचों आरोपियों को दो लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें भरने का निर्देश दिया। अदालत ने जमानत पर कई शर्तें भी लगाईं, जिनमें पासपोर्ट जमा करना, पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ना, मामले से जुड़े किसी भी गवाह से संपर्क या उसे प्रभावित नहीं करना और जरूरत पड़ने पर जांच में शामिल होते रहना शामिल है।

इससे पहले तीन सितंबर को अदालत ने इस मामले में आप नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को जमानत दी थी।

अदालत ने कहा था कि उसके समक्ष मौजूद साक्ष्य उन्हें राहत देने से इनकार करने के लिए ‘‘प्रथम दृष्टया अपर्याप्त’’ हैं।

अदालत ने बुधवार को कहा कि इस मामले में साक्ष्य मुख्य रूप से दस्तावेजी प्रकृति के हैं और जांच एजेंसियों के कब्जे में हैं।

अदालत ने कहा कि सभी आवेदक जमानत दिए जाने के लिए निर्धारित ‘ट्रिपल टेस्ट’ के मानदंडों को पूरा करते हैं, क्योंकि समाज में उनकी गहरी जड़ें हैं, वे स्थायी निवासी हैं और उनमें से किसी के भी फरार होने, न्याय से बचने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने का कोई जोखिम नहीं है।

राय के संबंध में अदालत ने कहा, ‘‘प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन के लेन-देन की कड़ी की पहले ही बारीकी से जांच की है और यहां तक कि ईडी ने भी आवेदक (राय) को गिरफ्तार करना जरूरी नहीं समझा।’’

अदालत ने कहा कि हालांकि ईडी का मामला और मूल मामला, जो भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से संबंधित है, वास्तव में एक-दूसरे से अलग और स्वतंत्र मामले हैं, लेकिन इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि जिस व्यक्ति के खिलाफ धन के लेन-देन की कड़ी होने का दावा किया गया है, उसकी पूरी तरह जांच की जा चुकी है और फिर भी उसकी गिरफ्तारी को जरूरी नहीं समझा गया।

अदालत ने कहा कि इसलिए पूर्व डीजेबी सीईओ को मूल अपराध में उसी धन के लेन-देन के आधार पर जेल में नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब उन्होंने ‘‘एक विश्वसनीय स्पष्टीकरण’’ दिया है। अदालत ने कहा कि कथित हवाला लेन-देन का राय से कोई सीधा संबंध नहीं है।

अदालत ने कहा, ‘‘आखिरकार, यह सवाल उठता है कि आरोपी नंबर दो (राय) को हिरासत में रखने से क्या उद्देश्य पूरा होगा, जबकि ये आरोप अभी साबित होने बाकी हैं। ऐसा करना मुकदमे से पहले सजा देने के समान होगा। उनकी गिरफ्तारी की तारीख से अब तक करीब 20 दिन बीत चुके हैं और प्रथम दृष्टया उनकी लगातार हिरासत अनावश्यक प्रतीत होती है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘निश्चित रूप से, जो कोई भी साजिश में शामिल होता है, चाहे वह साजिश शुरू में रचे जाने के बाद या उसके जारी रहने के दौरान शामिल हुआ हो, वह अन्य लोगों के कृत्यों के लिए जिम्मेदार होगा लेकिन इस मामले में आरोप अभी साबित किए जाने बाकी हैं, जो केवल मुकदमे के दौरान किया जा सकता है। किसी भी ऐसी साजिश को मान लेना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा और यह मुकदमे से पहले सजा देने से कम नहीं होगा।’’

अदालत ने कहा कि राय एक कार्यकारी अधिकारी थे, तकनीकी व्यक्ति नहीं, और निविदा प्रक्रिया उनके स्थानांतरण के बाद पूरी की गई थी।

यादव के संबंध में अदालत ने कहा कि धन के लेन-देन की जांच जारी होने और अपराध से अर्जित हुई पूरी आय बरामद नहीं होने के आधार पर उन्हें जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि कुर्रा के निजी खाते में कोई विशिष्ट राशि पहुंचने का पता नहीं चला है और कथित लेन-देन की लाभार्थी वह कंपनी थी, जिसमें वह कार्यकारी निदेशक थे।

अदालत ने कहा, ‘‘जब वर्मा पहले ही जांच में शामिल हो चुके हैं और उन्होंने स्वेच्छा से अपने बैंकिंग लेजर, आयकर रिटर्न और चालान जांच एजेंसी को सौंप दिए हैं, तो अब उनसे और क्या बरामद किया जाना बाकी है? ’’

अदालत ने कहा, ‘‘इसके बाद उनकी पुलिस हिरासत की दोबारा मांग नहीं की गई। इसलिए उनके कब्जे से अब कुछ भी बरामद किया जाना बाकी नहीं है।’’

अदालत ने कहा कि इस आधार पर भी उन्हें जमानत से वंचित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के चरण में की गई उसकी टिप्पणियों को मामले के गुण-दोष पर राय नहीं माना जाएगा।

भाषा

राखी नरेश

नरेश