नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) सरकार की एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए और यह केवल कागजों तक सीमित न रहकर वास्तविक रूप में लागू होना चाहिए।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) की अतिरिक्त सचिव मनमीत कौर नंदा ने यहां अशोका विश्वविद्यालय के ‘ऑफिस ऑफ लर्निंग सपोर्ट (ओएलएस) और ‘इंक्लूसिव यूनिवर्सिटी अलायंस’ (आईयूए) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नीतियों को कागजों तक सीमित रखने के बजाय व्यवहार में समावेशन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए छह सूत्री कार्ययोजना भी बताई, इसमें पांच प्रतिशत आरक्षण का क्रियान्वयन, उचित सुविधाएं उपलब्ध कराना, सहायक तकनीक एवं सहायता व्यवस्था को मजबूत करना, शिक्षकों एवं प्रशासन में संवेदनशीलता बढ़ाना तथा समय-समय पर सुगम्यता और सामाजिक ऑडिट के जरिए जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल है।
नंदा ने कहा, ‘‘पांच प्रतिशत आरक्षण को सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि हकीकत में लागू किया जाना चाहिए।’’
वर्ष 2016 में बनाए गए कानून में दिव्यांग छात्रों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि, कुछ संस्थानों द्वारा इस कानूनी प्रावधान का पालन नहीं किए जाने को लेकर अदालतों में याचिकाएं दायर की गई हैं।
भाषा जितेंद्र अविनाश
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