राजस्थान में पहली बार तेंदुओं पर रेडियो कॉलर लगाएगा वन विभाग

राजस्थान में पहली बार तेंदुओं पर रेडियो कॉलर लगाएगा वन विभाग

राजस्थान में पहली बार तेंदुओं पर रेडियो कॉलर लगाएगा वन विभाग
Modified Date: March 17, 2026 / 03:06 pm IST
Published Date: March 17, 2026 3:06 pm IST

(अविनाश बाकोलिया)

जयपुर, 17 मार्च (भाषा) जयपुर के झालाना जंगल से शहर में आने वाले तेंदुओं की बढ़ती सक्रियता के मद्देनजर राजस्थान वन विभाग ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए उनमें रेडियो कॉलर लगाने का फैसला किया है। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

मुख्य वन्यजीव संरक्षक के सी अरुण प्रसाद ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि तेंदुओं पर रेडियो कॉलर लगाने से न केवल वास्तविक समय पर उनके स्थान का पता चल सकेगा, बल्कि किसी भी आपात स्थिति में बचाव और नियंत्रण की कार्रवाई भी संभव हो पाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘झालाना लेपर्ड रिजर्व वर्तमान में 30 से अधिक तेंदुए हैं। यह जंगल चारों तरफ से रिहायशी इलाकों से घिरा हुआ है। इस कारण आए दिन तेंदुओं की हलचल आबादी वाले इलाकों में देखी जाती है। पिछले एक साल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल बना रहता है।’’

मुख्य वन्यजीव संरक्षक ने कहा कि इन्हीं चुनौतियों से निपटने और वन्यजीवों तथा इंसानों, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेडियो कॉलर तकनीक का सहारा लेने का निर्णय किया है।

उन्होंने बताया कि बेंगलुरु की एक कंपनी से रेडियो कॉलर मंगवा लिए गए हैं। आगामी एक सप्ताह में तेंदुओं पर रेडियो कॉलर लगा दिए जाएंगे। तेंदुओं के लिए रेडियो कॉलर बाघों की तुलना में हल्के होंगे।

के.सी. प्रसाद ने बताया कि रेडियो कॉलर की मुख्य विशेषता जीपीएस ट्रैकर है, जो तेंदुओं की गतिविधियों और उनके प्राकृतिक आवास पर डेटा इकट्ठा करता है।

उन्होंने कहा, “डेटा का विश्लेषण वन अधिकारियों को तेंदुए की गतिविधियों का अनुमान लगाने में मदद करेगा।”

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शुरुआत में रेडियो कॉलर प्रयोग के आधार पर लगाया जाएगा। रेडियो कॉलर उन तेंदुओं पर लगाया जाएगा जिनकी गतिविधि शहरी क्षेत्र में ज्यादा रहती है।

अधिकारियों ने बताया कि अभयारण्य से भटककर शहरी क्षेत्र में जाने वाले तेंदुओं पर रेडियो कॉलर लगाने से यह जानकारी भी मिल सकेगी कि तेंदुआ कहां से निकलता है, वापस जंगल की तरफ कब जाता है। प्रयोग सफल होने पर आबादी वाले इलाकों के समीप विचरण करने वाले अन्य तेंदुओं को भी रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे।

वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि राजस्थान में पहली बार तेंदुओं पर रेडियो कॉलर लगाए जा रहे हैं। यह प्रयोग सफल रहा तो इसे अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।

वन अधिकारियों ने बताया कि रेडियो कॉलर लगाने से यह पता चल सकेगा कि तेंदुए का प्राकृतिक आवास कितना बड़ा है। जंगल के कितने बड़े क्षेत्र में उसकी गतिविधि रहती है।

उन्होंने बताया कि रेडियो कॉलर लगने के बाद तेंदुओं की हर गतिविधि पर 24 घंटे निगरानी रखी जा सकेगी। जैसे ही कोई तेंदुआ आबादी वाले क्षेत्र की ओर बढ़ेगा, अलर्ट सिस्टम के जरिए क्षेत्र के कर्मी को तुरंत सूचना मिल जाएगी। इससे समय रहते बचाव, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जा सकेंगे।

भाषा बाकोलिया सुरभि रंजन

रंजन


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