दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ: आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार

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दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ: आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार

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  • Publish Date - July 24, 2026 / 04:59 PM IST,
    Updated On - July 24, 2026 / 04:59 PM IST

जम्मू, 24 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अपील की है कि वह अपने आंदोलन को ‘भारतीय’ बनाए रखें। ​​वांगचुक के अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के बाद कुमार ने आरोप लगाया कि ‘विदेशी ताकतों’ ने आंदोलन पर कब्जा कर लिया है।

कुमार ने युवाओं को देश-विरोधी ताकतों का ‘एजेंट’ बनने के खिलाफ चेतावनी दी। कुमार ने कहा कि वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) अलग-अलग चीज हैं और आरोप लगाया कि कॉजपा ‘विदेशी ताकतों की एजेंसी’ के तौर पर काम कर रही है।

कुमार ने कहा, ‘‘ये दोनों प्रकृति के लिहाज से अलग-अलग हैं। सोनम वांगचुक एक व्यक्ति हैं और कॉजपा बिल्कुल अलग है। राजनीतिक पार्टियों के एजेंडे भी अलग-अलग होते हैं। उन्होंने सबकी छवि खराब करने के लिए इन्हें मिला दिया है। इसीलिए सोनम वांगचुक ने खुद को इससे अलग कर लिया है।’’

कुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं कहूंगा कि उन्हें यह समझना चाहिए कि उनके आंदोलन पर विदेशियों ने कब्जा कर लिया है। इसलिए उन्हें अपने आंदोलन को भारतीय बनाए रखना चाहिए। उन्हें विदेशियों के हाथों की कठपुतली नहीं बनना चाहिए।’’

यह आरोप लगाते हुए कि कॉजपा विदेशी हितों के लिए काम कर रही है, उन्होंने कहा, ‘‘मैं वहां आने वाले युवाओं से कहूंगा कि वे सावधान रहें। जो लोग देश के साथ गद्दारी करते हैं और देश को धोखा देते हैं, उनकी कठपुतली या एजेंट न बनें।’’

उन्होंने राजनीतिक पार्टियों को राजनीति के लिए देश-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के खिलाफ चेतावनी दी। कुमार ने कहा, ‘‘उन्हें सकारात्मक राजनीति करनी चाहिए।’’

वांगचुक के अनशन खत्म करने का जिक्र करते हुए कुमार ने आरोप लगाया कि देश में ‘सकारात्मक राजनीति का माहौल खराब करने’ की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी पार्टियों ने शुरू में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) परीक्षा का मुद्दा उठाया था, लेकिन बाद में राजनीतिक मकसद के लिए आंदोलन का रुख मोड़ दिया।

बिना कोई सबूत दिए नेता ने आरोप लगाया कि इन आंदोलनों को ‘आंतरिक और बाहरी ताकतों’ का समर्थन हासिल है, जो नहीं चाहतीं कि भारत एक विकसित, समृद्ध और शिक्षित राष्ट्र बने।

हाल के वर्षों में भारत को दुनिया भर में अभूतपूर्व पहचान मिलने का दावा करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अगर दुनिया के सभी देशों ने किसी एक देश को अपने सर्वोच्च सम्मान दिए हैं, तो वह भारत है। अमेरिका, रूस, अरब देशों या ब्रिटेन को किसी ने भी ऐसे सम्मान नहीं दिए हैं। भारत दुनिया के लिए एक आदर्श के तौर पर उभर रहा है और सभी को सरकार का सहयोग करना चाहिए।’’

आरएसएस नेता ने हाल ही में एक पुलिस कॉन्स्टेबल की हत्या के बाद पाकिस्तान पर भारत में हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद अपने ही लोगों का दमन कर रहा है और वह भारत को अस्थिर करने वाली नीतियां अपना रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान ऐसी साजिशें रचता रहता है। पाकिस्तान न तो खुद शांति से रहना चाहता है और न ही दूसरों को शांति से रहने देना चाहता है। वह हर दिन ऐसी हरकतें करता रहता है।’’

पड़ोसी देश पर निशाना साधते हुए उन्होंने दावा किया कि वह अपने ही लोगों (चाहे पश्तून हों, अहमदी हों, कश्मीरी हों या कोई और) का दमन कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘जो देश अपने ही लोगों की रक्षा या सम्मान नहीं कर सकता, वह दुनिया का भला चाहने वाला नहीं बन सकता। पाकिस्तान को शांति, सद्भाव और विकास की दिशा में काम करना चाहिए और भारत को अस्थिर करने वाली नीतियां छोड़ देनी चाहिए।’’

कारगिल विजय दिवस से पहले आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुमार ने बंटवारे के बाद से अपनी जान गंवाने वाले सभी नागरिकों, पुलिसकर्मियों और सशस्त्र बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

उन्होंने शहीद स्तंभ स्थापित करने के लिए सेना, प्रशासन और अन्य एजेंसियों को बधाई दी और लोगों, खासकर बच्चों से अपील की कि वे सैनिकों के बलिदान के सम्मान में 26 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज के साथ स्मारक पर पहुंचें।

भाषा संतोष नरेश

नरेश