केरलम के पूर्व डीजीपी थाचनकारी को चार साल का सश्रम कारावास
केरलम के पूर्व डीजीपी थाचनकारी को चार साल का सश्रम कारावास
कोट्टयम (केरलम), 17 सितंबर (भाषा) केरलम की एक अदालत ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में केरलम के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) टोमिन जे. थाचनकारी को बृहस्पतिवार को चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
खबरों के अनुसार, केरलम में यह पहला मामला है जिसमें डीजीपी स्तर के किसी अधिकारी को आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के मामले में सजा सुनाई गई है।
कोट्टयम सतर्कता अदालत के न्यायाधीश के. वी. रजनीश ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत थाचनकारी को दोषी पाया। अदालत ने भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी के खिलाफ 30.84 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने थाचनकारी को तिरुवनंतपुरम की पुजप्पुरा केंद्रीय जेल भेजने का आदेश दिया, जहां से वह फैसले के खिलाफ केरल उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं।
सजा सुनाए जाने से पहले अंतिम सुनवाई के दौरान थाचनकारी ने अदालत से अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए सजा सुनाने का अनुरोध किया।
हालांकि, अभियोजन पक्ष ने कहा कि जिस पद पर उन्होंने सेवा दी है, उसे देखते हुए किसी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 96 गवाहों और 271 दस्तावेजों की जांच की गई, जबकि बचाव पक्ष की ओर से 23 गवाहों को पेश किया गया और 55 दस्तावेज अदालत में पेश किए गए।
एर्णाकुलम स्थित सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) की विशेष इकाई ने थाचनकारी के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वीएसीबी की जांच में 64.70 लाख रुपये के ऐसे खर्च का पता चला, जिसका थाचनकारी आय के किसी संबंधित स्रोत से हिसाब नहीं दे सके।
जांच दल के अनुसार, 2003 से 2007 के बीच थाचनकारी ने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से 135.80 प्रतिशत अधिक संपत्ति कथित तौर पर अर्जित की थी।
इस मामले में लोक अभियोजक के के श्रीकांत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की।
श्रीकांत ने कहा, “यह गंभीर अपराध है कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिस पर जनता के जीवन और संपत्ति की रक्षा करने की जिम्मेदारी है, ने इस तरह अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की।”
उन्होंने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “इस समय यह फैसला अभियोजन पक्ष के लिए बेहद अनुकूल है। आगे की कार्रवाई सतर्कता निदेशक के साथ विचार-विमर्श के बाद आने वाले दिनों में तय की जाएगी।”
उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष की सभी दलीलों को अदालत ने स्वीकार किया है।
श्रीकांत ने कहा, “आज का फैसला एक बार फिर साबित करता है कि अधिकारी चाहे कितने भी बड़े पद पर हो, वह कानून से बंधा है। सभी के लिए समान न्याय!”
आय से अधिक संपत्ति मामले में थाचनकारी के खिलाफ शिकायत करने वाले बॉबी कुरुविला और एलेक्जेंडर कुरुविला ने कहा कि वे फैसले से संतुष्ट हैं।
उन्होंने कहा कि वे दोबारा सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) का रुख करेंगे, क्योंकि इस मामले की जांच में केवल 2003 से 2007 के बीच थाचनकारी द्वारा कथित तौर पर अर्जित संपत्ति को ही शामिल किया गया था।
बॉबी ने कहा, “देश में एक बड़ी बुराई के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ना और उसमें जीत हासिल करना बेहद संतोष और खुशी देता है। लेकिन इसके पीछे, जैसा कि आप जानते हैं, भारी आर्थिक नुकसान और सबसे बढ़कर दृढ़ संकल्प था। इसी वजह से कोई पीछे नहीं हटा।”
एलेक्जेंडर ने कहा कि यह मामला इस बात की सीख है कि भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जा सकती है और देश की अदालतें “आंखें बंद करके नहीं बैठी हैं।”
उन्होंने कहा, “अगर मामलों की उचित तरीके से पैरवी की जाए और सबूत पेश किए जाएं, तो अदालतें दोषियों को सजा देंगी। यहां आम लोगों की प्रतिक्रिया और सोच भ्रष्टाचार, खासकर भ्रष्ट नौकरशाहों और नेताओं के खिलाफ है। इसलिए ज्यादातर लोग इस फैसले से खुश होंगे।”
भाषा रंजन नरेश
नरेश

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