मुक्त व्यापार समझौतों से कश्मीर के बागवानी क्षेत्र को खतरा, सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए:पीडीपी विधायक

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मुक्त व्यापार समझौतों से कश्मीर के बागवानी क्षेत्र को खतरा, सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए:पीडीपी विधायक

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 04:45 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 04:45 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

जम्मू, 17 फरवरी (भाषा) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक वहीद उर रहमान पारा ने विभिन्न देशों के साथ हाल में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से जम्मू-कश्मीर के बागवानी क्षेत्र, खास तौर पर सेब उद्योग, पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मंगलवार को मांग की।

पारा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले पर विचार करने का आग्रह करने की सामूहिक अपील की जानी चाहिए।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र में विभिन्न विभागों के लिए आवंटन पर चर्चा के दौरान पारा ने कहा कि एक सर्वदलीय बैठक इस मुद्दे पर आम सहमति बनाने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा, “अगर आप सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा करें, तो प्रधानमंत्री से इस मामले पर विचार करने की अपील की जा सकती है। कश्मीर के लिए बेरोजगारी और आतंकवाद की समस्या से उबरने के हमारे प्रयास आर्थिक पुनरुद्धार से गहराई से जुड़े हुए हैं।”

पारा ने इस बात पर जोर दिया कि सेब उद्योग की रक्षा किए बिना जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था में फिर से जान नहीं फूंकी जा सकती है।

पीडीपी विधायक ने भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते को एक ऐसा मुद्दा करार दिया, जो पार्टी लाइन से परे है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से किसानों और बागवानों की चिंताओं को सामूहिक रूप से दूर करने के लिए बैठक बुलाने का आग्रह किया, जिसमें सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और कांग्रेस के अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व अन्य विपक्षी दल भी शामिल हों।

पारा ने कहा, “मेरा सरकार, मुख्यमंत्री और सदन में उपस्थित सदस्यों से अनुरोध है कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, क्योंकि यह हम सभी का मुद्दा है-विपक्ष का, भाजपा का, कांग्रेस का और सरकार का भी।”

उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताई और कहा कि क्षेत्र को आतंकवाद मुक्त बनाने के लिए आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार आवश्यक है।

पुलवामा से विधायक पारा ने कहा कि मुक्त व्यापार नीति बागवानी क्षेत्र के लिए, खास तौर पर आपदा के प्रति संवेदनशील इलाकों में, एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि देश भर के किसान इसके प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।

भाषा पारुल माधव

माधव