अमृतसर, 15 जनवरी (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सिख परंपराओं और सिद्धांतों पर कथित टिप्पणियों के लिए तलब किए जाने के बाद बृहस्पतिवार को अकाल तख्त सचिवालय के समक्ष पेश हुए। हालांकि मान पहले नहीं हैं जिन्हें सिख धर्म की शीर्ष पीठ के समक्ष पेश होना पड़ा है। इससे पहले कई शीर्ष नेताओं की अकाल तख्त के समक्ष पेशी हो चुकी है।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला और प्रकाश सिंह बादल से लेकर भारत के पूर्व राष्ट्रपति जैल सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री बूटा सिंह तक, प्रायश्चित के लिए तख्त के समक्ष पेश हो चुके हैं।
अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज्ज ने पिछले सप्ताह कहा था कि चूंकि मान एक ‘पतित’ (बाल मुंडवाने वाला सिख) हैं और उन्हें अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्हें तख्त सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए तलब किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस समन पर कहा कि वह बृहस्पतिवार को पेश हुए।
पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला को 1986 में ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ के तहत स्वर्ण मंदिर में पुलिस कार्रवाई का आदेश देने के लिए तनखैया (धार्मिक दुराचार का दोषी) घोषित कर उनका बहिष्कार किया गया था।
‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ अप्रैल 1986 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर से चरमपंथियों और आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए चलाया गया था।
बरनाला ने अंततः दो साल बाद प्रायश्चित किया। उन्हें धार्मिक दंड के रूप में स्वर्ण मंदिर की सामुदायिक रसोई में भक्तों के जूते और बर्तन साफ करने का आदेश दिया गया, साथ ही गले में एक तख्ती लटकाने को कहा गया था जिस पर लिखा था ‘‘मैं पापी तू बख्शन हार’’ (मैं दोषी हूं, प्रभु मुझे क्षमा करें)।
बरनाला से पहले, एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के दिग्गज नेता, प्रकाश सिंह बादल को 1979 में अमृतसर में सिख-निरंकारी संघर्ष में उनकी कथित भूमिका के लिए तलब किया गया था। उस संघर्ष में 13 सिख प्रदर्शनकारी मारे गए थे।
अकाल तख्त ने 1984 में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जैल सिंह को ‘तनखैया’ घोषित करते हुए तलब किया था। वे तख्त के समक्ष पेश हुए, अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया और माफी मांगकर प्रायश्चित किया।
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह पर 1984 में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के बाद तख्त भवन के पुनर्निर्माण के संबंध में अकाल तख्त के निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप लगा था। पुनर्निर्माण की ‘सेवा’ निहंग बाबा संता सिंह को दी गई थी, जो सिख समुदाय को स्वीकार्य नहीं थी।
बूटा सिंह को इसके लिए ‘तनखैया’ घोषित कर समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। बाद में उन्होंने माफी मांगी, तख्त द्वारा दी गई धार्मिक सजा भुगती और प्रायश्चित किया।
ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान क्षतिग्रस्त होने के बाद निहंग बाबा संता सिंह द्वारा पुनर्निर्मित अकाल तख्त भवन को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा फिर से ध्वस्त कर दिया गया और उसका पुनर्निर्माण किया गया।
अकाल तख्त ने शिरोमणि अकाली दल और उसकी सरकार द्वारा 2007 से 2017 तक की गई ‘‘गलतियों’’ के लिए अकाली नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को ‘तनखैया’ घोषित किया था।
सुखबीर बादल 2024 में सिख संस्था के समक्ष ‘तनखाह’ (धार्मिक दंड) के लिए पेश हुए थे।
भाषा धीरज नरेश
नरेश