खेतों से लेकर ‘मन की बात’ तक: बाराबंकी के युवक के विचारों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं
खेतों से लेकर ‘मन की बात’ तक: बाराबंकी के युवक के विचारों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं
बाराबंकी (उप्र), 31 मार्च (भाषा) बाराबंकी के एक किसान के युवा बेटे, जिनके ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान कल्याण पर विचारों का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ में हुआ था, का कहना है कि गांवों को मजबूत करना ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने की कुंजी है।
सौरभ बैसवार (22 वर्ष) ने कहा कि फरवरी में केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा ऑनलाइन आयोजित राष्ट्रव्यापी ‘बजट क्विज’ प्रतियोगिता में भाग लेने के बाद उनके विचारों ने ध्यान आकर्षित किया, जिसमें लगभग 12 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया था।
उन्होंने बताया कि “भारत की आत्मा गांवों में बसती है” और ‘विकसित भारत 2047’ का सपना तभी पूरा होगा जब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
फरवरी में केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा ऑनलाइन आयोजित राष्ट्रव्यापी ‘बजट क्विज’ प्रतियोगिता में भाग लेने के बाद उनके विचारों ने राष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। इस प्रतियोगिता में लगभग 12 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया। स्क्रीनिंग के कई चरणों के बाद लगभग 1.6 लाख लोगों को निबंध लेखन के लिए चयनित किया गया। बैसवार ने निबंध में ‘किसान कल्याण’ पर अपने विचार व्यक्त किए।
उनका निबंध भारतीय कृषि की चुनौतियों और किसानों के संघर्षों पर प्रकाश डालने वाला था। उनके निबंध की गंभीरता ने प्रधानमंत्री को 29 मार्च को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इसका जिक्र करने के लिए प्रेरित किया।
फतेहपुर तहसील के सूरतगंज प्रखंड के सोहई गांव के निवासी बैसवार ने कहा कि उन्होंने ‘मेरा युवा भारत’ पहल के तहत आयोजित ‘बजट क्वेस्ट’ प्रतियोगिता में भाग लिया।
बैसवार ने कहा, ‘‘अपने निबंध में मैंने आलू और मेंथा किसानों की समस्याओं पर चिंता जताई और किसानों को कच्ची उपज के बजाय चिप्स और स्टार्च जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद बेचने में सक्षम बनाने के लिए तहसील स्तर पर आलू प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का सुझाव दिया।’’
बैसवार ने अपने निबंध में सरकारी सौर योजनाओं में निजी कंपनियों द्वारा घटिया उपकरणों के उपयोग का आरोप लगाया और कम से कम 10 वर्षों की अनिवार्य रखरखाव गारंटी का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘‘मैंने एआई-आधारित स्मार्ट खेती केंद्रों, खेतों तक बेहतर ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी और गांवों में सौर लाइट का भी सुझाव दिया।’’
वर्तमान में जहांगीराबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में आईटीआई पाठ्यक्रम की पढ़ाई कर रहे बैसवार अध्ययन के चलते बाराबंकी शहर में रहते हैं। उनके पिता प्रभाकर बैसवार एक किसान हैं।
बैसवार ने कहा, ‘‘मैं अब सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल होने के लक्ष्य के साथ संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) परीक्षा की तैयारी करने की योजना बना रहा हूं।’’
भाषा सं. जफर मनीषा संतोष
संतोष
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