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नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि देश 2013 की ‘‘नीतिगत पंगुता’’ से निकलकर अब ‘‘नीतिगत गतिशीलता’’ के दौर में पहुंच गया है, लेकिन भारत को ‘नाजुक पांच’ अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचाने वाले लोग अब देश की 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि को पचा नहीं पा रहे हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह में मोदी ने 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर दिए अपने संबोधन को याद किया। मोदी ने कहा कि उस समय उनके संबोधन ने ‘‘लहर’’ पैदा की थी और 13-14 साल बाद आज भी उसका प्रभाव बरकरार है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘वर्ष 2013 में जब मैं एसआरसीसी आया था, तब मैंने एक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया था। उस समय मैंने जो कुछ कहा था, वह मेरा दृढ़ विश्वास था। मैंने हमेशा उन बातों को अपने जीवन में उतारा है। देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने की भावना ही शब्दों के रूप में सामने आई थी। मैंने पानी से भरे गिलास का उदाहरण दिया था। कुछ लोग गिलास को आधा भरा देखते हैं, जबकि कुछ लोग उसे आधा खाली बताते हैं।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘मैंने कहा था कि ऐसे लोग हैं जो गिलास को पूरी तरह भरा हुआ देख सकते हैं-आधा पानी से और आधा हवा से।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि उस दौर में देश निराशा के माहौल से गुजर रहा था।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैंने कहा था कि मैं गिलास को पूरी तरह भरा हुआ देखता हूं। उस समय विकास अपने सबसे निचले स्तर पर था, महंगाई आसमान छू रही थी। उस दौर में घोटाले चरम पर थे और भ्रष्टाचारी बेखौफ घूम रहे थे। आतंकवादी बेखौफ थे और पाकिस्तान बेकाबू था।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘आज आतंकवाद फैलाने वालों को करारा जवाब दिया जा रहा है। अगर पाकिस्तान कोई नापाक हरकत करता है तो भारतीय सेना उसके घर में घुसकर हमला करती है। नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है…नीतिगत पंगुता से निकलकर नीतिगत गतिशीलता तक भारत ने लंबा सफर तय किया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक समय था जब वे हमें ‘नाजुक पांच’ (अर्थव्यवस्था में शामिल देश) कहते थे। आज वही लोग भारत को सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में देख रहे हैं।’’
मोदी ने कहा कि कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने उनके आशावादी नजरिये पर सवाल उठाए और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल को लेकर संदेह जताया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि 7.8 प्रतिशत उसकी आर्थिक ताकत को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भारत को ‘नाजुक पांच’ अर्थव्यवस्थाओं में पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोग अब इस उपलब्धि को पचा नहीं पा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों ने 2013 में दिए गए उनके संबोधन पर फिर से गौर किया है और आज भी उस संबोधन का प्रभाव बरकरार है।
मोदी ने कहा, ‘‘मैं युवाओं से गुज़ारिश करूंगा कि वे 2013 के हालात और उस समय की सुर्खियों पर नज़र डालें। अख़बारों की सुर्खियों में ये बातें छाई रहती थीं— एलओसी पर भारतीय सैनिक मारे गए, विश्व बैंक ने भारत के विकास का अनुमान घटाया, चालू खाता घाटा अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा और महंगाई दर 10 प्रतिशत हुई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि युवा उस समय के हालात से अवगत नहीं होंगे।’’
उन्होंने कई पीढ़ियों को संवारने के लिए एसआरसीसी की तारीफ की। ‘जेन जी’ से जुड़ने का प्रयास करते हुए प्रधानमंत्री ने कॉलेज के पूर्व छात्रों को ‘‘ओजी’’ कहा।
उन्होंने कहा, ‘‘जब कोई व्यक्ति 100 वर्ष का जीवन पूरा करता है तो उसे गहन ज्ञान और व्यापक अनुभव वाला माना जाता है। जब कोई संस्थान 100 वर्ष पूरे करता है तो वह उपलब्धियों का सागर बन जाता है। एसआरसीसी ने कई पीढ़ियों को संवारा है और उन्हें एक उज्ज्वल भविष्य से जोड़ा है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘अपने 100 वर्षों के सफर में श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स ने पीढ़ियों को आकार दिया है और उन्हें उज्ज्वल भविष्य से जोड़ा है। जो लोग यहां आए, उन्होंने पढ़ाई की और जो यहां से निकले, वे निखरकर आगे बढ़े। एसआरसीसी के पूर्व छात्र बेहद खास रहे हैं। आपकी भाषा में कहें तो वे ‘ओजी’ हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कॉलेज के शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में 100 रुपये का स्मृति सिक्का भी जारी किया।
मोदी ऐसे समय में एसआरसीसी के कार्यक्रम में शामिल हुए हैं, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने युवा पीढ़ी तक पहुंच बनाने के अपने प्रयास तेज किए हैं।
प्रधानमंत्री ने इस साल अप्रैल में कॉलेज की 100वीं वर्षगांठ के मौके पर अपने आवास पर कॉलेज के शासी मंडल और एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। इस अवसर पर उन्होंने एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया था।
भाषा आशीष सुरेश
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