कानपुर (उप्र), तीन मार्च (भाषा) कानपुर पुलिस ने लोगों के पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके जाली कंपनियां बनाकर बड़े पैमाने पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की चोरी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
पुलिस को शक है कि यह गिरोह एक बड़े अंतरराज्यीय कर चोरी नेटवर्क का हिस्सा है और इस मामले में कपिल मिश्रा व अमरदीप नामक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह गिरोह ई-रिक्शा चालकों, छात्रों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को रियायती दरों पर कर्ज का लालच देकर निशाना बनाता था।
लाल ने कहा कि अभी तक की जांच में कुल 250 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है।
उन्होंने कहा, “आरोपियों ने कर्ज दिलाने के बहाने लोगों से उनके पैन कार्ड, आधार कार्ड और हस्ताक्षरित दस्तावेज लिए। बाद में इनका इस्तेमाल जाली कंपनी पंजीकृत कराने, जीएसटी नंबर हासिल करने और बड़े पैमाने पर ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (आईटीसी) ठगी के लिए बैंक खाते खोलने में किया।”
लाल ने बताया कि नजीराबाद में रहने वाले अनुराग वर्मा ने शिकायत की कि उनकी बहन की शादी के लिए कर्ज लेने के नाम पर जमा किए गए दस्तावेज का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके बाद यह मामला सामने आया।
उन्होंने बताया कि साइबर प्रकोष्ठ की जांच में पता चला कि वर्मा की जानकारी के बिना उनके नाम पर पहले से ही एक कंपनी का पंजीकरण कर लिया गया था और उसके जरिए वित्तीय लेन-देन किए जा रहे थे।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि बैंक खातों के विश्लेषण मोबाइल कॉल विवरण और डिजिटल वित्तीय लेनदेन की जांच में एक ऐसे नेटवर्क का पता चला जो इस तरह दस्तावेजों का इस्तेमाल करके कई जाली कंपनियां संचालित कर रहा था।
उन्होंने बताया कि इस दौरान पता चला कि पड़ोसी उन्नाव जिले के एक ई-रिक्शा चालक मनोज गुप्ता के बेटे उज्ज्वल के नाम पर खोले गए बैंक खाते से 117 करोड़ रुपये का वित्तीय लेन-देन हुआ।
अधिकारियों ने कहा कि परिवार ने इलाज के लिए ऋण लेते समय अपने दस्तावेज जमा किए थे और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर एक कंपनी और बैंक खाता खोला गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि जिन लोगों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया उनमें छात्र, दिहाड़ी मजदूर और निजी संस्थानों में काम कर रहे कर्मचारी शामिल थे।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच में पता चला है कि आरोपियों की बनाई कंपनियां सिर्फ़ कागज़ों पर थीं और बिना सामान या सेवा के फर्जी ‘इनवॉइस’ जारी करती थीं। उन्होंने बताया कि गिरोह के सदस्यों ने नकली ई-वे बिल बनाए और टर्नओवर बढ़ाने व फर्जी आईटीसी फायदों का दावा करने के लिए इनवॉइस को आपस में जुड़ी कंपनियों के बीच बांटा गया।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि गैर-कानूनी तरीके से मिले टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल कर देनदारियों को कम करने या जीएसटी रिफंड पाने के लिए किया गया।
उन्होंने बताया कि सुबूतों के आधार पर पुलिस ने कपिल मिश्रा और अमर दीप उर्फ राज को गिरफ्तार किया।
अधिकारियों को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे होंगे।
भाषा सं सलीम जोहेब
जोहेब