नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म: वडोदरा की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया

नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म: वडोदरा की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया

नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म: वडोदरा की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया
Modified Date: August 20, 2026 / 04:51 pm IST
Published Date: August 20, 2026 4:51 pm IST

वडोदरा, 20 अगस्त (भाषा) गुजरात के वडोदरा में वर्ष 2024 में नवरात्रि की रात एक किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में एक अदालत ने बृहस्पतिवार को पांच लोगों को दोषी करार दिया।

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सी. एम. पवार ने दोषियों की सजा की अवधि तय करने के लिए 25 अगस्त को सुनवाई निर्धारित की है।

विशेष लोक अभियोजक नयन सुखड़वाला ने बताया कि पांच आरोपियों में से तीन ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया था, जबकि दो अन्य आरोपी मौके पर मौजूद थे और उन्होंने पीड़िता तथा उसके पुरुष मित्र को परेशान किया था। उन्होंने कहा कि कानून के तहत सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मौके पर मौजूद रहने वाले व्यक्ति भी अपराध के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।

सुखड़वाला ने कहा, ‘अदालत ने ‘साझा मंशा’ को ध्यान में रखते हुए सभी पांचों आरोपियों को दोषी पाया।’

अदालत ने पांचों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) की धाराओं के तहत सामूहिक दुष्कर्म, सबूत नष्ट करने और डकैती समेत अन्य आरोपों में दोषी ठहराया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोषियों की पहचान मुमताज, अजमल, मुन्ना बंजारा, सैफ और शाहरुख के रूप में हुई है। इनकी उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच है।

यह घटना चार अक्टूबर 2024 की रात की है, जब नवरात्रि के दौरान शहर में जगह-जगह आयोजित गरबा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे थे। उस समय पीड़िता की उम्र 16 वर्ष थी और वह अपने पुरुष मित्र के साथ बाहर गई थी।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने पीड़िता के मित्र को काबू में रखकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह रात करीब 11 बजे शहर के लक्ष्मीपुरा इलाके में अपने बचपन के दोस्त से मिलने गई थी। वे स्कूटी से भायली इलाके से लौट रहे थे, तभी आधी रात के करीब एक सुनसान सड़क पर दो-पहिया वाहनों पर सवार पांच लोगों ने उन्हें रोक लिया।

सुखड़वाला ने कहा, ‘पीड़िता और वहां मौजूद उसके पुरुष मित्र के बयान दो ऐसे प्रत्यक्ष सबूत थे जिन पर अदालत ने विचार किया। पीड़िता ने सबसे पहले घटना के बारे में अपने भाई और मां को बताया था और उनके बयानों का भी सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया गया।’

उन्होंने बताया कि पीड़ित का मोबाइल फोन लूटकर विश्वामित्र नदी में फेंक दिया गया था। पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम ने फोन को बरामद करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। हालांकि, अदालत ने इसे (कि फोन लूटा गया था और नदी में फेंक दिया गया था) सबूत के तौर पर स्वीकार कर लिया।

अभियोजक ने बताया कि 26 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में से तीन कैमरों में आरोपी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे, जिसे अदालत ने साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किया।

भाषा

शुभम मनीषा

मनीषा


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