SC HPEC on Jantar-Mantar Protests: अब सामने आएगी जंतर-मंतर प्रदर्शन और हिंसा की पूरी सच्चाई!.. सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन.. गठित की हाईपावर कमेटी, जानें सदस्यों की संख्या

जंतर-मंतर समेत देशभर में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय समिति बनाई।

SC HPEC on Jantar-Mantar Protests: अब सामने आएगी जंतर-मंतर प्रदर्शन और हिंसा की पूरी सच्चाई!.. सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन.. गठित की हाईपावर कमेटी, जानें सदस्यों की संख्या

Supreme Court HPEC on Jantar-Mantar Protest || Image- Instagram FILE

Modified Date: August 20, 2026 / 05:54 pm IST
Published Date: August 20, 2026 5:54 pm IST
HIGHLIGHTS
  • सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय कमेटी बनाई
  • पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की हिंसा जांचेगी
  • CCTV और ड्रोन रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने नई दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए 5 सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) का गठन किया है। (Supreme Court HPEC on Jantar-Mantar Protest) समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। इसके अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी डॉ. एल.आर. बिश्नोई समिति के सदस्य होंगे।

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पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की हिंसा दोनों की जांच

सुप्रीम कोर्ट ने समिति को पुलिस और अर्धसैनिक बलों पर लगाए गए अत्यधिक और अनुपातहीन बल प्रयोग के आरोपों की जांच करने को कहा है। वहीं प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस और सुरक्षाकर्मियों पर कथित हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने के मामलों की भी जांच होगी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा सादे कपड़ों में मौजूद सुरक्षाकर्मियों द्वारा कथित हिंसा के आरोपों की भी जांच की जाएगी।

महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े आरोपों पर विशेष ध्यान

कोर्ट ने महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा, उत्पीड़न और यौन दुर्व्यवहार के आरोपों को प्राथमिकता से जांचने को कहा है। समिति पुलिस कार्रवाई के दौरान गंभीर रूप से घायल लोगों को मिली चिकित्सा और अन्य सहायता की भी जांच करेगी। (Supreme Court HPEC on Jantar-Mantar Protest) इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों की निगरानी, निजता के अधिकार और शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकार से जुड़े मामलों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

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CCTV और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और जांच एजेंसियों को प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-वॉर्न कैमरा फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार रिकॉर्ड और PCR कॉल लॉग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। समिति जरूरत पड़ने पर फोरेंसिक, तकनीकी और अन्य विशेषज्ञों की मदद भी ले सकेगी। शिकायतकर्ता और गवाह अपनी पहचान सुरक्षित रखने के लिए जरूरत पड़ने पर गुमनाम तरीके से भी दस्तावेज और सुझाव समिति के सामने रख सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया।

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