(गुंजन शर्मा)
लोनी (गाजियाबाद), 14 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद के लोनी इलाके का उल्लेख रामायण में उस स्थान के तौर पर किया गया है जहां लक्ष्मण ने रावण की बहन शूर्पणखा की नाक काटी थी, लेकिन इन दिनों यह शहर दुनिया का सबसे प्रदूषित स्थान होने की वजह से चर्चा में है।
आईक्यूएयर द्वारा जारी विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट-2025 में 143 देशों के 9,400 से अधिक शहरों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया और पाया गया कि लोनी में पीएम2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता 112.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित सुरक्षित सीमा से 22 गुना अधिक है।
कागजों पर यह आंकड़ा चिंताजनक प्रतीत होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोनी में सब कुछ सामान्य है। शहर के किसी भी सड़क पर जाएं तो यातायात धीमा होने लगता है। सड़क के दोनों ओर पुरानी इमारतें और दुकानें हैं, जिनकी बाहरी दीवारें समय के साथ काली पड़ गई हैं।
ईंट-भट्टे, रंगाई और धातु प्रसंस्करण इकाइयां, प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों से चलने वाली अनधिकृत औद्योगिक इकाइयां, जहरीले ई-कचरे का अंधाधुंध दहन – इन सबसे प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, जिससे वहां रहने वाले सात लाख से अधिक लोगों के फेफड़ों में जहरीली, हानिकारक और दम घोंटने वाली गैसों और गंध का मिश्रण पहुंच रहा है।
इसके अलावा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच पारगमन गलियारे के रूप में लोनी का उपयोग करने वाले डीजल ट्रक, क्षेत्र में और उसके आसपास चल रहे निर्माण कार्यों के कारण उड़ने वाली धूल और प्लास्टिक सहित कचरे को नियमित रूप से जलाने से भी समस्या विकराल हो रही है।
लोनी में प्रतिदिन आने-जाने वाले वाहनों से निकलने वाला लगातार उत्सर्जन समस्या को और भी गंभीर बना रहा है।
गत चार दशक से लोनी में रह रहे महेंद्र (62) कहते हैं कि उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों और साथ ही राष्ट्रीय राजधानी से ई-कचरा लाकर रात में लोनी में जला दिया जाता है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ ई-कचरे को बेरोकटोक जलाने से कई बार रातों में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। हमने कई शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। धुआं जहरीला है और दिन के समय वाहनों और रेत ले जाने वाले ट्रकों से उड़ने वाली धूल से दृश्यता कम रहती है… खांसी यहां मौसमी नहीं, बल्कि साल भर रहती है।’’
जब ‘पीटीआई-भाषा’ के इस संवाददाता ने लोनी के कुछ हिस्सों का दौरा किया, तो सड़क किनारे ई-कचरे के अवशेष बिखरे हुए दिखाई दिए, साथ ही जगह-जगह प्लास्टिक कचरे के ढेर भी लगे हुए थे।
इस इलाके में खेती करने वाले बॉबी त्यागी ने बताया कि सरकार केवल पराली जलाने पर रोक लगाना चाहती है, लेकिन प्रदूषण के कई अन्य स्रोत भी हैं जो इससे भी अधिक खतरनाक हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘फसलें प्रभावित हो रही हैं, पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है, लेकिन जब भी प्रदूषण का मुद्दा उठाया जाता है, किसानों को दंडित किया जाता है और कार्रवाई केवल पराली जलाने पर शोर मचाने तक ही सीमित रहती है। मेरे बच्चे दूसरे शहरों में चले गए हैं क्योंकि पिछले पांच वर्षों में यहां रहना दुभर हो गया है।’’
दिल्ली के एक महाविद्यालय में वास्तुशास्त्र की पढ़ाई करने वाली 24 वर्षीय तृष्णा बताती है, ‘‘यहां एयर प्यूरीफायर किसी काम के नहीं हैं क्योंकि इनके फिल्टर हर दो महीने में बदलने पड़ते हैं। कुछ ही घरों में एयर प्यूरीफायर लगे हैं। यहां कोई भी बालकनी या छत का इस्तेमाल नहीं करता क्योंकि जलने की गंध और धूल के कारण यह मुश्किल हो जाता है।’’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश का लोनी शहर दुनिया का सबसे प्रदूषित स्थान बन गया है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद के पास स्थित लोनी भारतीय पौराणिक कथाओं और इतिहास के लिहाज से समृद्ध है।
रमेश ने कहा, ‘‘इसमें भारत की मिश्रित संस्कृति को दर्शाने वाले कई महत्वपूर्ण पूजा स्थल हैं। इसका उल्लेख रामायण में भी मिलता है। यहां कुछ खूबसूरत बगीचे और फलों के बाग भी हैं।’’
लोनी सिंधु-गंगा के मैदान में स्थित है। स्थानीय परंपरा और पौराणिक कथाओं के अनुसार, लोनी राक्षस राजा लवणासुर (या लवण) की राजधानी थी।
पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम को पूरी तरह से नया रूप देने की आवश्यकता है ताकि पीएम2.5 के स्तर को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा सके, जो पूरे देश में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा बन गया है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीसीबी) ने अवैध और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर नकेल कसने के लिए निगरानी दल गठित किए हैं।
यूपीसीबी के क्षेत्रीय कार्यालय में सहायक पर्यावरण अभियंता विपुल कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि मार्च से अब तक इस क्षेत्र में संचालित 120 से अधिक अवैध औद्योगिक इकाइयों को बंद किया जा चुका है।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश