जनकपुरी के स्कूल में बच्ची से दुष्कर्म: अदालत ने महिला शिक्षिका की जमानत रद्द की
जनकपुरी के स्कूल में बच्ची से दुष्कर्म: अदालत ने महिला शिक्षिका की जमानत रद्द की
नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके के एक निजी स्कूल में तीन साल की बच्ची से कथित दुष्कर्म के मामले में एक महिला शिक्षिका को दी गई जमानत बुधवार को रद्द कर दी और उसे तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने 29 जून को इस मामले के मुख्य आरोपी, स्कूल के ‘केयरटेकर’ को दी गई जमानत भी रद्द कर दी थी और उसे एक जुलाई को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने बुधवार को दिल्ली पुलिस की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में शिक्षिका को जमानत के आदेश को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने 20 मई को शिक्षिका को जमानत दी थी।
न्यायमूर्ति बनर्जी ने कहा, ‘‘प्रतिवादी को तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जाता है।’’
शिक्षिका को कथित तौर पर घटना की जानकारी अधिकारियों से छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और निचली अदालत ने 14 मई को उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था।
यह घटना एक मई को सामने आई, जब बच्ची की मां ने जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में ‘केयरटेकर’ ने उनकी बेटी का यौन उत्पीड़न किया।
शिकायत के अनुसार, बच्ची दाखिले के दूसरे दिन यानी 30 अप्रैल को स्कूल गई थी। घर लौटने के बाद उसने दर्द की शिकायत की। मां के पूछने पर बच्ची ने घटना की जानकारी दी।
बच्ची की मां की शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(1) (दुष्कर्म के लिए सजा) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 (यौन हमले के लिए सजा) के तहत मामला दर्ज किया।
पुलिस ने बताया कि बच्ची ने आरोपी की पहचान कर ली, जिसके बाद स्कूल के ‘केयरटेकर’ को एक मई को गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हालांकि, अभियोजन पक्ष के कड़े विरोध के बावजूद द्वारका की एक अदालत ने सात मई को उसे जमानत दे दी थी।
भाषा आशीष नरेश
नरेश

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