पणजी, 14 जनवरी (भाषा) गोवा सरकार ने विधानसभा में जारी मौजूदा शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार को छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने, गोवा मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक और मुंडकर (बेदखली से संरक्षण) अधिनियम, 1975 में संशोधन से संबंधित तीन अहम विधेयक पेश किए।
गोवा सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में गोवा जन विश्वास (कानून संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया जिसका उद्देश्य अवैध निर्माण, अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्रों में भूमि का दुरुपयोग, अतिक्रमण, कचरा निपटान और सार्वजनिक स्थानों में बाधा उत्पन्न करने जैसे छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना है।
इस विधेयक में विश्वास आधारित शासन तथा जीवन एवं व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए अपराध के ऐसे मामलों में कारावास के प्रावधानों को मौद्रिक दंड से बदलने का प्रस्ताव है। इस पर बाद में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
गोवा सरकार ने छोटे व्यापारियों के लिहाज से कर नियमों को आसान बनाने, बार-बार होने वाली कागजी कार्रवाई को कम करने और निपटान आवेदनों की स्पष्ट समय सीमा निर्धारित करने के लिए विधानसभा में एक विधेयक पेश किया है।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा के जारी शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार को गोवा मूल्य वर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश किया।
विधेयक में डीलरों के लिए कर की संरचना को नियंत्रित करने वाले गोवा वैट अधिनियम, 2005 की धारा सात में व्यापक बदलाव प्रस्तावित हैं। इस संशोधन का उद्देश्य छोटे व्यापारियों पर अनुपालन का बोझ कम करना और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देना है।
गोवा सरकार ने मंगलवार को एक और विधेयक पेश किया जिसमें किराएदारों या ‘मुंडकरों’ की सहमति के बिना ऐसे मकानों के हस्तांतरण पर रोक का प्रावधान किया गया है जिसमें वे रह रहे हों।
राज्य के राजस्व मंत्री अतानासियो मोंसेरेट ने मंगलवार को सदन में गोवा मुंडकर (बेदखली से संरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया।
इसका उद्देश्य गोवा मुंडकर (बेदखली से संरक्षण) अधिनियम, 1975 में संशोधन करना है, जो धारा नौ की स्थान लेगा। यह ‘भटकर’ (मकान मालिक) द्वारा आवासीय मकानों के हस्तांतरण पर प्रतिबंधों से संबंधित है।
‘मुंडकर’ एक संरक्षित किरायेदार या निवासी होता है जिसे अपने आवास पर ऐतिहासिक अधिकार प्राप्त होते हैं।
भाषा सुरभि पवनेश
पवनेश