विड़िण्गम बंदरगाह में अदाणी की हिस्सेदारी के हस्तांतरण के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य: सतीशन

विड़िण्गम बंदरगाह में अदाणी की हिस्सेदारी के हस्तांतरण के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य: सतीशन

विड़िण्गम बंदरगाह में अदाणी की हिस्सेदारी के हस्तांतरण के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य: सतीशन
Modified Date: July 1, 2026 / 11:31 am IST
Published Date: July 1, 2026 11:31 am IST

तिरुवनंतपुरम, एक जुलाई (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने बुधवार को कहा कि ‘अदाणी पोर्ट्स’ यहां स्थित विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह में अपनी हिस्सेदारी राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना हस्तांतरित नहीं कर सकती।

सतीशन ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि प्रस्तावित हिस्सेदारी हस्तांतरण को लेकर मीडिया में खबरें आई हैं लेकिन कंपनी ने मंजूरी के लिए सरकार से संपर्क नहीं किया है।

सतीशन ने कहा, ‘‘समझौते के अनुसार, वे सरकार की मंजूरी के बिना इन शेयरों का हस्तांतरण नहीं कर सकते। राज्य सरकार की मंजूरी अनिवार्य है और कुछ मामलों में केंद्र सरकार की मंजूरी भी आवश्यक है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार को अब तक इस तरह की मंजूरी के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है।

अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) ने मंगलवार को कहा था कि स्विट्जरलैंड की एमएससी केरल के विड़िण्गम बंदरगाह में करीब 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। एमएससी दुनिया की सबसे बड़ी नौवहन, परिवहन और ‘लॉजिस्टिक’ कंपनियों में शामिल है।

मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (एमएससी) अपनी इकाई टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (टीआईएल) के माध्यम से यह हिस्सेदारी खरीदेगी।

समझौते के तहत टीआईएल 1.397 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करेगी जो 2.85 अरब अमेरिकी डॉलर के कुल सौदे मूल्य में उसकी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है।

भाषा

सिम्मी वैभव

वैभव


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