सरकार ने व्यापार सुधार विधेयक को हरी झंडी दी; लाइसेंस, निरीक्षण नियमों को आसान करने का प्रस्ताव

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सरकार ने व्यापार सुधार विधेयक को हरी झंडी दी; लाइसेंस, निरीक्षण नियमों को आसान करने का प्रस्ताव

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  • Publish Date - August 5, 2026 / 04:14 PM IST,
    Updated On - August 5, 2026 / 04:14 PM IST

नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भाषा) दिल्ली कैबिनेट ने व्यवसाय सुगमता विधेयक, 2026 के मसौदे को मंजूरी दे दी है, जिसमें कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए स्व-प्रमाणन और तीन साल तक कोई नियमित निरीक्षण नहीं करने का प्रस्ताव है।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि विधेयक कानून बनने पर व्यवसायों को मंजूरी, पंजीकरण, लाइसेंस, अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और अन्य अनुमतियों के लिए कई विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता को खत्म कर देगा।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसके लिए एकल खड़की व्यवस्था स्थापित की जाएगी, जिसके माध्यम से एक ही ऑनलाइन पोर्टल पर अधिकांश व्यावसायिक सेवाएं उपलब्ध होंगी।

गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस विधेयक पर चर्चा हुई और इसे मंजूरी दे दी गयी। बयान में कहा गया है कि कैबिनेट द्वारा पहले ही अनुमोदित विधेयक को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया गया है।

उन्होंने कहा कि भवन निर्माण स्वीकृति, फैक्टरी लाइसेंस, अग्नि संबंधी मंजूरी, पानी, सीवर और बिजली कनेक्शन, रेरा पंजीकरण, सहकारी समितियों के पंजीकरण सहित अनेक सेवाएं इसी पोर्टल के माध्यम से तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएंगी।”

गुप्ता ने कहा, “इस (प्रस्तावित) कानून की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक ‘डीम्ड अप्रूवल’ की व्यवस्था होगी यानी यदि कोई सक्षम प्राधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है तो संबंधित स्वीकृति, पंजीकरण या एनओसी स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी और आवेदक उसे सीधे ऑनलाइन पोर्टल से डाउनलोड भी कर सकेगा।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पूरी व्यवस्था के संचालन की जिम्मेदारी दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) को सौंपी जाएगी और यही संस्था आवेदन प्राप्त होने से लेकर अंतिम स्वीकृति मिलने तक पूरी प्रक्रिया के लिए एकमात्र जवाबदेह नोडल एजेंसी होगी तथा सभी संबंधित विभाग और नागरिक एजेंसियां इसके माध्यम से समन्वय स्थापित करेंगी।

उन्होंने कहा, “कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए स्व-प्रमाणन की व्यवस्था लागू की जाएगी। निर्धारित श्रेणियों के अंतर्गत अग्नि सुरक्षा, भवन योजना स्वीकृति, प्रदूषण संबंधी अनुमति तथा लो-टेंशन बिजली कनेक्शन जैसी प्रक्रियाएं स्व घोषणा के आधार पर पूरी की जा सकेंगी। इससे छोटे, कम जोखिम वाले और कम खतरे वाले उद्यम बिना अनावश्यक देरी के अपना कारोबार शुरू कर सकेंगे।”

सीएमओ ने कहा कि जिन उद्यमों का पहले से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) , भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) , सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम अथवा श्रम संहिताओ के तहत पंजीकरण है, उन्हें अलग से व्यापार लाइसेंस, स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस, भोजनालय लाइसेंस या दुकान एवं प्रतिष्ठान पंजीकरण लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे एक ही उद्देश्य के लिए कई प्रकार के लाइसेंस लेने की बाध्यता समाप्त होगी और कारोबारियों पर अनुपालन का बोझ कम होगा।

मुख्यमंत्री कहा, “नए पंजीकरण के बाद सामान्य परिस्थितियों में तीन वर्षों तक किसी प्रकार का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाएगा। केवल गंभीर प्रकृति की शिकायत मिलने पर ही निरीक्षण किया जा सकेगा। इससे उद्योगों को अनावश्यक निरीक्षणों से राहत मिलेगी और भरोसे पर आधारित प्रशासनिक व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।”

गुप्ता ने कहा कि इस विधेयक में औद्योगिक विस्तार को सुगम बनाने के उद्देश्य से तल क्षेत्र अनुपात (एफएआर), भू-आवरण क्षेत्र, ‘सेटबैक’ (भवन से आवश्यक खुला स्थान) तथा भवन की ऊंचाई से संबंधित प्रतिबंधों में छूट देने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों में विभिन्न विकास नियंत्रण मानकों को भी ढील देने का प्रस्ताव है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यह प्रस्तावित कानून केंद्र सरकार के अनुपालन में कमी और विनियमन-मुक्ति पहल (चरण-दो) के तहत तैयार किया गया है। यह जन विश्वास विधेयक, 2023 की भावना के अनुरूप है।

भाषा नोमान नोमान नरेश

नरेश