सरकार का स्वास्थ्य पर खर्च 2022-23 में तीन गुना बढ़कर 3.85 लाख करोड़ रुपये हो गया: एनएचए

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सरकार का स्वास्थ्य पर खर्च 2022-23 में तीन गुना बढ़कर 3.85 लाख करोड़ रुपये हो गया: एनएचए

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  • Publish Date - May 27, 2026 / 08:16 PM IST,
    Updated On - May 27, 2026 / 08:16 PM IST

नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (एनएचए) के अनुमानों के अनुसार, स्वास्थ्य सेवा पर सरकार का खर्च पिछले एक दशक में लगभग तीन गुना बढ़कर 2022-23 में 3.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। वहीं, स्वास्थ्य पर लोगों की जेब से होने वाले निजी खर्च में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च 2013-14 के 1.13 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 3.85 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक खर्च में की गई भारी वृद्धि को दर्शाता है।

देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सरकारी स्वास्थ्य व्यय का हिस्सा 2013-14 में 1.15 प्रतिशत था, जो 2022-23 में बढ़कर 1.43 प्रतिशत हो गया। 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए नयी जीडीपी शृंखला के अनुसार, यह आंकड़ा 1.48 प्रतिशत है।

मंत्रालय ने कहा कि सार्वजनिक खर्च में वृद्धि से परिवारों द्वारा स्वास्थ्य सेवा पर किए जाने वाले खर्च में काफी कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल स्वास्थ्य खर्च में लोगों की जेब से होने वाले खर्च की हिस्सेदारी 2013-14 के 64.2 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 43.4 प्रतिशत रह गई है। यह दर्शाता है कि इलाज कराने वाले लोगों पर अब वित्तीय बोझ पहले के मुकाबले काफी कम हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकारी स्वास्थ्य व्यय का हिस्सा 2013-14 में 28.6 प्रतिशत था, जो 2022-23 में बढ़कर 43.7 प्रतिशत हो गया।

एनएचए के अनुमानों में यह उल्लेख किया गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार के खर्च में बड़ी वृद्धि हुई। आपातकालीन उपायों, ‘आपातकालीन कोविड रिस्पांस पैकेज’ (एक और दो) के क्रियान्वयन और देशव्यापी टीकाकरण अभियान के कारण साल 2021-22 में स्वास्थ्य व्यय जीडीपी के 1.84 प्रतिशत तक पहुंच गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी की अवधि के दौरान, कुल स्वास्थ्य व्यय के हिस्से के रूप में लोगों द्वारा अपनी जेब से किया गया खर्च और घटकर 39.4 प्रतिशत हो गया।

भाषा आशीष नरेश

नरेश