सरकार जरूरत पड़ने पर पट्टे की जमीन वापस ले सकती है: जिमखाना क्लब के नोटिस पर मंत्री का बयान

सरकार जरूरत पड़ने पर पट्टे की जमीन वापस ले सकती है: जिमखाना क्लब के नोटिस पर मंत्री का बयान

सरकार जरूरत पड़ने पर पट्टे की जमीन वापस ले सकती है: जिमखाना क्लब के नोटिस पर मंत्री का बयान
Modified Date: June 1, 2026 / 07:13 pm IST
Published Date: June 1, 2026 7:13 pm IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) दिल्ली जिमखाना क्लब को अपना परिसर खाली करने के लिए केंद्र द्वारा कहे जाने के कुछ दिनों बाद, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को कहा कि सरकार विकास कार्यों तथा किसी अन्य उद्देश्य के लिए पट्टे पर दी गई सरकारी भूमि वापस ले सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि जहां भी आवश्यक होगा, अन्य मामलों में भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि ‘‘जमीन, भूमि एवं विकास कार्यालय (एल एंड डी ओ) की एक मूलभूत विशेषता’’ है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता से पहले भी एल एंड डी ओ को जमीन हस्तांतरित की जाती रही है। उन्होंने आगे कहा कि चूंकि उस समय दिल्ली में कोई राज्य सरकार नहीं थी, इसलिए केंद्र सरकार जमीन की मालिक बन गयी।

ब्रिक्स शहरीकरण मंच से संबंधित एक प्रेस वार्ता के दौरान संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में मनोहर लाल ने कहा, ‘‘अधिकांश मामलों में, भूमि पट्टे पर दी गई है। पट्टे की अवधि समाप्त होने या किसी अन्य उद्देश्य से अवधि समाप्त होने से पहले भी पट्टे पर दी गई भूमि को खाली कराया जा सकता है…।‘‘

उन्होंने कहा, “जो जमीन हम वापस ले रहे हैं, उसका उपयोग आवश्यकतानुसार किया जाएगा और यह प्रक्रिया जारी रहेगी।”

उन्होंने कहा कि जहां भी जरूरत होगी, सरकार अपनी जमीन वापस ले सकती है।

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास विभाग ने 22 मई को दिल्ली जिमखाना क्लब को “रक्षा अवसंरचना को सुरक्षित करने” के आधार पर पांच जून तक उसकी 27.3 एकड़ भूमि वापस करने के लिए कहा।

लुटियन दिल्ली के हरे-भरे इलाके में स्थित दो, सफदरजंग रोड पर फैले विशाल परिसर को इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड (जिसे अब दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड के नाम से जाना जाता है) को एक सामाजिक और खेल क्लब के रखरखाव के लिए पट्टे पर दिया गया था।

यह लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री के आवास से सटा हुआ है, जो शहर के सबसे मूल्यवान और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूभागों में से एक पर स्थित है, और उच्च सुरक्षा वाले प्रशासनिक क्षेत्र के भीतर आता है, जहां कई महत्वपूर्ण केंद्रीय सरकारी और रक्षा प्रतिष्ठान भी स्थित हैं।

आदेश में कहा गया है कि रक्षा अवसंरचना को मजबूत करने और सुरक्षित करने तथा अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा उद्देश्यों के लिए परिसर की अत्यंत आवश्यकता है।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश


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