छात्रों की आत्महत्या की सूचना पुलिस को तुरंत दें: न्यायालय का उच्च शिक्षा संस्थानों को निर्देश

छात्रों की आत्महत्या की सूचना पुलिस को तुरंत दें: न्यायालय का उच्च शिक्षा संस्थानों को निर्देश

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  • Publish Date - January 15, 2026 / 10:27 PM IST,
    Updated On - January 15, 2026 / 10:27 PM IST

नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को देश भर के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को निर्देश दिया कि वे किसी भी छात्र की आत्महत्या या अस्वभाविक मृत्यु की घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस को तुरंत सूचित करें।

शीर्ष न्यायालय ने कई निर्देश जारी करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान यह सुनिश्चित करने के अपने मूलभूत कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकते कि उनके संस्थान समग्र रूप से सुरक्षित, न्यायसंगत, समावेशी और सीखने के अनुकूल वातावरण हों।

न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने उच्च शिक्षा संस्थानों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से संबंधित अन्य सभी नियामक निकायों को छात्रों की आत्महत्याओं या अस्वाभाविक मौतों की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को किसी भी छात्र की आत्महत्या या अस्वभाविक मृत्यु की घटना की सूचना, चाहे वह कहीं भी हुई हो (अर्थात परिसर में, छात्रावासों में, पेइंग गेस्ट वाले आवास में, या संस्थान के बाहर), घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस को देनी होगी। यह नियम सभी छात्रों पर लागू होना चाहिए, चाहे वे कक्षा में, दूरस्थ शिक्षा में या ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हों।’’

केंद्रीय विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों या किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान के मामले में, जो उपरोक्त ढांचे के अंतर्गत नहीं आते हैं, इसकी सूचना भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग को देनी होगी।

उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया कि प्रत्येक आवासीय उच्च शिक्षा संस्थान में चौबीसों घंटे उपयुक्त चिकित्सा सहायता उपलब्ध होनी चाहिए, यदि परिसर में नहीं तो एक किलोमीटर के दायरे में, ताकि छात्रों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रदान की जा सके।

पीठ ने कहा, ‘‘सार्वजनिक और निजी, दोनों ही उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की कमी की खबरों को ध्यान में रखते हुए, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी रिक्त संकाय पदों (शिक्षण और गैर-शिक्षण दोनों) को चार महीने की अवधि के भीतर भरा जाए, जिसमें हाशिए पर पड़े और अल्पप्रतिनिधित्व वाले समुदायों के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित पदों को प्राथमिकता दी जाए, जिनमें दिव्यांग जनों के लिए आरक्षित पद भी शामिल हैं।’’

शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि आत्महत्याओं से संबंधित नमूना पंजीकरण प्रणाली के आंकड़ों को, विशेष रूप से 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों के मामलों को, उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या से होने वाली मौतों के बेहतर और अधिक सटीक अनुमानों के लिए केंद्रीय स्तर पर बनाए रखा जाना चाहिए।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश