सरकार ने न तो अपने वादे पूरे किए और न ही वह जनता की उम्मीदों पर खरी उतरी: विपक्ष
सरकार ने न तो अपने वादे पूरे किए और न ही वह जनता की उम्मीदों पर खरी उतरी: विपक्ष
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) बजट में किसानों और अनुसूचित जातियों, जनजातियों की उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाते हुए राज्यसभा में बुधवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने कहा कि सरकार ने न तो अपने वादे पूरे किए और न ही वह जनता की उम्मीदों पर खरी उतरी।
राज्यसभा में बजट 2026-27 पर हो रही चर्चा को आगे बढ़ाते हुए समाजवादी पार्टी के रामजीलाल सुमन ने कहा कि कृषि को बजट में पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया है जबकि यह क्षेत्र आज भी सर्वाधिक रोजगार देता है। ‘‘आप तो रोजगार देने का वादा पूरा नहीं कर पाए।’’
उन्होंने कहा कि 1950 में देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में कृषि का योगदान 56.5 फीसदी था जो आज घट कर बमुश्किल पांच प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा ‘‘किसानों की आत्महत्या का सिलसिला जारी है। उनकी आमदनी आज तक दोगुनी नहीं हुई, उल्टे उन्हें तो उनकी लागत का मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की बात तो कोसों दूर है।’’
सपा सदस्य ने कहा कि देश को किसानों ने आत्मनिर्भर बनाया और उनका 90 हजार करोड़ का खाद्यान्न भंडारों में नष्ट हो जाता है। ‘‘क्या उनके उपजाए अनाज की कोई कीमत नहीं है ? आजादी के 75 साल बाद भी अनाज के समुचित भंडारण की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती ? किसानों का कर्ज भी माफ नहीं किया गया। उनकी हालत सुधारने के लिए उनका कर्ज माफ करना जरूरी है।’’
बीजू जनता दल के देवाशीष सामंतराय ने शिकायत की कि बजट में हर बार की तरह इस बार भी ओडिशा उपेक्षा का शिकार हो गया है और अब तो यह हर साल की स्थिति है।
उन्होंने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी ओडिशा के 19 जिले रेल संपर्क से वंचित हैं। ‘‘हर साल हम कई तूफान, चक्रवात, बाढ़ का सामना करते हैं और विशेष श्रेणी वाले राज्य का दर्जा देने की हमारी मांग धरी की धरी रह जाती है। औद्योगिक गलियारा भी हमारी लंबित मांग है।’’
बसपा के रामजी ने कहा कि बजट में आम आदमी को महंगाई से कोई राहत नहीं मिली और बजट के नाम पर सरकार ने औपचारिकता पूरी कर ली। उन्होंने कहा कि खाली पड़े दस लाख पदों पर नियुक्ति के बारे में सरकार ने बजट में कुछ नहीं कहा।
उन्होंने कहा कि किसानों को एमएसपी, कर्ज माफी से लेकर उनके उर्वरक सहित अन्य सामान की खरीद में कोई राहत नहीं दी गई।
रामजी ने कहा कि गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए क्योंकि देश के कई सरकारी स्कूलों की इमारत खस्ताहाल हो चुकी है, कई स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।
उन्होंने लखीमपुर में एक केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने की मांग भी की।
भाजपा के संजय सेठ ने कहा कि बजट सुधार और काम का बजट है और इसमें हर वर्ग की जरूरतों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने बताया कि आधुनिक दौर में युद्ध किस तरह से लड़ा जा सकता है और बजट में इसके लिए समुचित प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने कहा ‘‘भारत हर तरह की स्थिति के लिए तैयार है।’’
कांग्रेस के चंद्रकांत दामोदर हंडोरे ने कहा कि अनुसूचित जातियों और जनजातियों के कल्याण के लिए बजट में समुचित राशि आवंटित नहीं की गई है। ‘‘यह उदासीनता नयी नहीं है।’’
उन्होंने दावा किया कि सरकार अपनी ही नीतियों को लागू नहीं कर पा रही है और उसे इस संबंध में श्वेत पत्र लाना चाहिए।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के गोल्ला बाबूराव ने कहा कि देश का विकास तब ही होगा जब अनुसूचित जातियों, जनजातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति का विकास होगा।
उन्होंने कहा कि बजट में विभिन्न मदों में हम अगर बजट कटौती की बात करते हैं तो हमें यह भी देखना चाहिए कि क्या पिछले बरसों में उन मदों में आवंटित राशि पूरी तरह खर्च की गई थी या नहीं? ‘‘आप पिछला पैसा ही उपयोग नहीं कर पाते, और नए आवंटन में कटौती कर डालते हैं।’’
निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा ने बजट का समर्थन करते हुए कहा कि विरोध केवल इसलिए ही नहीं करना चाहिए कि विरोध करना है। ‘‘कैंसर की दवाएं सस्ती की गई हैं और यह बेहद सराहनीय कदम है।’’
चर्चा अधूरी रही।
भाषा मनीषा माधव
माधव

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