सरकार को वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील करनी चाहिए: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री

सरकार को वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील करनी चाहिए: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री

सरकार को वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील करनी चाहिए: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री
Modified Date: July 16, 2026 / 04:36 pm IST
Published Date: July 16, 2026 4:36 pm IST

श्रीनगर, 16 जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जताई और कहा कि केंद्र सरकार को उनसे अनशन समाप्त करने की अपील करनी चाहिए थी।

उन्होंने कहा कि राजनीति में भी मानवीय संवेदना और करुणा के लिए जगह होनी चाहिए।

अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘उन्हें भूख हड़ताल पर बैठे कई दिन हो गए हैं। जहां तक मुझे जानकारी है, उनकी केवल एक मांग है कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और परीक्षा रद्द होने से बच्चों को काफी परेशानी और तनाव का सामना करना पड़ा, इसलिए शिक्षा मंत्री को या तो इस्तीफा देना चाहिए या उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।’

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने आश्चर्य जताया कि वांगचुक का वजन कम होने और अनशन का उनकी सेहत पर असर पड़ने के बावजूद केंद्र सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

उन्होंने कहा, ‘हैरानी की बात है कि उन्हें अनशन पर बैठे 18 दिन हो गए हैं, शायद आज 19वां दिन है। उनका करीब नौ किलोग्राम वजन कम हो गया है और इसका उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है लेकिन सरकार अपने रुख पर कायम है और किसी भी तरह उनसे अनशन समाप्त करने की अपील नहीं कर रही। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन कहीं न कहीं उसमें मानवीय संवेदना और करुणा के लिए भी स्थान होना चाहिए।’

अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दौरान अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए आंदोलन के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रियों को प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए भेजा था और उन्हें अनशन समाप्त कर संवाद का रास्ता अपनाने के लिए मनाने का प्रयास किया था।

उन्होंने कहा, ‘लेकिन अब तक सोनम वांगचुक से बातचीत का कोई प्रयास नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख क्या होगा, यह तो नहीं पता, लेकिन हमें निश्चित रूप से वांगचुक के स्वास्थ्य की चिंता है।’

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की मांग गलत नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘कई लोग (राजनेता) वहां गए हैं। वे नीट परीक्षा के मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं, हमें भी लगता है कि उनकी मांग गलत नहीं, बल्कि सही है। लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि यह सरकार इन बातों पर ध्यान भी क्यों नहीं देती।’

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पिछले 25 दिनों से अधिक समय से नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है।

वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए थे और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

अब्दुल्ला ने अपने चाचा और पूर्व मंत्री मुस्तफा कमाल के निधन पर शोक व्यक्त करने कमाल के आवास पर पहुंचे लोगों में से कुछ पर शोकाकुल परिवार के घर के बाहर राजनीति करने का भी आरोप लगाया और इसकी आलोचना की।

उन्होंने कहा, ‘यहां शोकसभा जारी है। कल ‘चौरम’ (शोक का चौथा दिन) है। ऐसे समय में राजनीति से कुछ दूरी रखनी चाहिए। हैरानी की बात है कि जो लोग अंदर आकर शोक संवेदना व्यक्त करते हैं, वही बाहर निकलकर राजनीति करने लगते हैं। अगर राजनीति ही करनी है, तो शोक व्यक्त करने मत आइए, क्योंकि यह अजीब लगता है।’

अब्दुल्ला ने कहा, ‘जिस घर में आप शोक संवेदना प्रकट करने आते हैं, उसी घर के बाहर राजनीति करने लगते हैं। राजनीति करनी है तो अपने घर के बाहर कीजिए। जिस घर में किसी का निधन हुआ हो और जहां शोक का माहौल हो, उसके बाहर मैं राजनीति की बात नहीं करूंगा। आप लोगों ने वांगचुक के बारे में बात की, मैंने बस इतना ही कहा।’

भाषा

राखी मनीषा

मनीषा


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