सरकार ने एडीजीपी अजितकुमार को जल्दबाजी में नहीं बल्कि प्रक्रिया के तहत निलंबित किया : सतीशन

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सरकार ने एडीजीपी अजितकुमार को जल्दबाजी में नहीं बल्कि प्रक्रिया के तहत निलंबित किया : सतीशन

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  • Publish Date - July 29, 2026 / 03:15 PM IST,
    Updated On - July 29, 2026 / 03:15 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 29 जुलाई (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने बुधवार को कहा कि सरकार ने अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एम.आर. अजितकुमार को सभी जरूरी प्रक्रियाओं का अनुपालन करने के बाद निलंबित किया था और इसीलिए प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने इस फैसले पर रोक नहीं लगाई।

मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल की बैठक बाद यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया ने आरोप लगाया है कि अजितकुमार को बचाने के लिए सरकार ने कार्रवाई में देरी की।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, हमने बिना किसी जल्दबाजी के और सभी पहलुओं एवं रिपोर्ट पर मंथन करने के बाद ही कार्रवाई की। सरकार के तौर पर हमें प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं का पालन करना होता है। हम केवल मीडिया में आई खबरों के आधार पर तुरंत कार्रवाई नहीं कर सकते। चूंकि हमने सही प्रक्रिया का पालन करते हुए सोच-समझकर फैसला लिया था इसलिए न्यायाधिकरण ने निलंबन के आदेश पर रोक नहीं लगाई।’’

केरल सरकार ने 24 जुलाई को अजितकुमार को निलंबित करने का आदेश जारी किया था। उन पर 15 दिसंबर को 2023 अलप्पुझा में ‘नव केरल सदस’ कार्यक्रम के दौरान युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमले की जांच में हस्तक्षेप करने का आरोप है। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी होने तक उन्हें निलंबित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर, इस मामले में शामिल कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया। इसके बाद, एसआईटी की दूसरी रिपोर्ट में एडीजीपी की भूमिका का जिक्र था। उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने मामले की समीक्षा की, कानूनी सलाह ली और फिर इसे सरकार को भेजा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने और गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने रिपोर्ट पर संज्ञान लिया और अजितकुमार को निलंबित करने का फैसला किया।

इससे पहले चेन्निथला ने कहा कि निलंबित अजितकुमार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद पर पदोन्नति मिलने की संभावना नहीं है।

गृह मंत्री ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि अजितकुमार का निलंबन अब भी प्रभावी है और प्रशानिक न्यायाधिकरण ने इस पर कोई रोक नहीं लगाई है।

चेन्निथला ने संवाददाताओं को बताया कि पिछले साल तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा डीजीपी के तौर पर पदोन्नति के लिए मंजूर की गई सूची में अजितकुमार का नाम शीर्ष पर था।

मंत्री ने कहा कि सामान्य प्रक्रिया के तहत उन्हें पदोन्नति मिल जाती क्योंकि वह सूची में सबसे वरिष्ठ थे।

उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय सेवा नियमावली के तहत किसी अधिकारी के पदोन्नति में तभी रुकावट आ सकती है, जब उसे निलंबित किया गया हो या उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही हो या किसी आपराधिक मामले में उसके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया हो।

भाषा धीरज सिम्मी

सिम्मी