कब्रें भी नहीं रहीं सुरक्षित: केरल में ग्रेनाइट स्लैब चोरी की घटनाओं से लोग स्तब्ध

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कब्रें भी नहीं रहीं सुरक्षित: केरल में ग्रेनाइट स्लैब चोरी की घटनाओं से लोग स्तब्ध

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  • Publish Date - July 29, 2026 / 03:26 PM IST,
    Updated On - July 29, 2026 / 03:26 PM IST

पथनमथिट्टा (केरल), 29 जुलाई (भाषा) केरल के पथनमथिट्टा जिले के मल्लपल्ली स्थित गिरजाघरों के कब्रिस्तान वर्षों से ऐसे स्थान रहे हैं, जहां परिवार अपने दिवंगत परिजनों को शांतिपूर्वक श्रद्धांजलि देने और उन्हें याद करने के लिए आते रहे हैं, लेकिन यहां अब चोरी की ऐसी घटना सामने आई है जिसने लोगों को हैरानी में डाल दिया है।

कब्रिस्तान में लगातार दो दिनों में दो कब्रों पर लगी ग्रेनाइट की स्लैब चोरी हो गयीं जिससे कब्रें खुली पड़ी हैं और स्थानीय लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि ये किसने किया और आखिरकार कोई मृतकों के अंतिम विश्राम स्थल को क्यों निशाना बनाएगा?

लगातार हुई इन दो घटनाओं ने मल्लपल्ली के लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। यहां कब्रिस्तान केवल दफनाने की जगह नहीं, बल्कि यादों, आस्था और पारिवारिक इतिहास के प्रतीक माने जाते हैं।

ताजा घटना मल्लपल्ली के ‘मार थोमा चर्च’ के कब्रिस्तान में सामने आई, जहां थाइकोट्टाथिल परिवार के एक सदस्य की कब्र पर लगी ग्रेनाइट की स्लैब गायब मिली। गिरजाघर के प्रबंधन ने इस संबंध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

इससे 24 घंटे पहले मंकुझीपाडी स्थित ‘मार थोमा चर्च’ के कब्रिस्तान में भी इसी तरह की घटना हुई थी।

मंकुझीपाडी में थन्निक्कल परिवार से जुड़ी कब्र पर लगी बड़ी ग्रेनाइट स्लैब भी चोरी हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

शिकायत के अनुसार, मल्लपल्ली स्थित चर्च से चोरी हुई ग्रेनाइट स्लैब लगभग छह फुट लंबी और तीन फुट चौड़ी थी। इसकी चोरी का पता तब चला, जब लोग प्रार्थना के लिए कब्रिस्तान पहुंचे।

प्रभावित परिवारों का कहना है कि इस चोरी ने उन्हें आर्थिक नुकसान से कहीं अधिक भावनात्मक आघात पहुंचाया है, क्योंकि इससे उन स्थानों की पवित्रता भंग हुई है जिन्हें हमेशा सम्मान और शांति का प्रतीक माना जाता है।

पुलिस का मानना है कि कोई एक व्यक्ति यह काम नहीं कर सकता।

जांचकर्ताओं के अनुसार, इतनी भारी ग्रेनाइट स्लैब को बिना मदद के उठाकर ले जाना संभव नहीं है। पुलिस को संदेह है कि इसमें कई लोगों का गिरोह शामिल है और चोरी की गई स्लैब को ले जाने के लिए किसी वाहन का इस्तेमाल किया गया होगा।

जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है।

दोनों चोरियां ऐसे कब्रिस्तानों में हुईं, जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे। इससे आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों ने जानबूझकर ऐसे स्थानों को निशाना बनाया।

फिलहाल पुलिस को दोनों मामलों में कोई ठोस सुराग नहीं मिला है और न ही किसी संदिग्ध की पहचान हो सकी है। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या दोनों घटनाएं एक ही गिरोह ने अंजाम दी हैं।

मल्लपल्ली के कई परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि स्लैब किसने चुराई, बल्कि यह भी है कि ऐसा क्यों किया गया। उनके लिए कब्रें केवल पत्थर नहीं, बल्कि अपने प्रियजनों की स्मृतियों, सम्मान और अंतिम विश्राम स्थल का प्रतीक हैं।

भाषा शोभना नरेश

नरेश