ग्रेट निकोबार परियोजना परिवर्तनकारी साबित होगी : उप राज्यपाल जोशी

ग्रेट निकोबार परियोजना परिवर्तनकारी साबित होगी : उप राज्यपाल जोशी

ग्रेट निकोबार परियोजना परिवर्तनकारी साबित होगी : उप राज्यपाल जोशी
Modified Date: June 18, 2026 / 03:58 pm IST
Published Date: June 18, 2026 3:58 pm IST

(सुजीत नाथ)

श्री विजय पुरम, 18 जून (भाषा) अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के उप राज्यपाल डी.के. जोशी ने बृहस्पतिवार को कहा कि महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना भारत के समुद्री व्यापार के लिए परिवर्तनकारी साबित होगी और इस केंद्र शासित प्रदेश को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख व्यापार परागमन केंद्र के तौर पर स्थापित करेगी।

जोशी ने कहा कि अब यह परियोजना अब क्रियान्वयन के चरण की ओर बढ़ रही है और इसका मुख्य हिस्सा इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (आईसीटीटी)देश के समुद्री व्यापार में अहम योगदान देगा।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘ पहले चरण में, 20 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से यह टर्मिनल करीब 60 लाख टीईयू को संभालने में सक्षम होगा और इसे शुरू होने के तीन साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है। ’’

उन्होंने बताया कि ‘‘अंतिम चरण में, इसकी क्षमता बढ़कर 2.1 करोड़ टीईयू तक हो सकती है, जिससे यह न केवल भारत में, बल्कि संभवतः पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़े कंटेनर बंदरगाह में से एक बन जाएगा।’’

टीईयू कंटेनर जहाजों की कार्गो क्षमता और बंदरगाहों पर माल सभांलने की क्षमता का आकलन करने की एक मानक इकाई है।

जोशी ने मलाका जलडमरूमध्य के नजदीक ग्रेट निकोबार होने के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बंदरगाह वैश्विक जहाजरानी मार्गों में एक प्रमुख परामगन केंद्र के तौर पर उभर सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत क्रियान्वयित की जाने वाली इस परियोजना का उद्देश्य बंदरगाह आधारित विकास और पर्यावरण से जुड़े ज़रूरी सुरक्षा उपायों व स्थानीय समुदायों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है।

ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर हालांकि कुछ हलकों में पर्यावरण संबंधी चिंताएं जताई गई हैं। कांग्रेस का दावा है कि इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होगा और बड़े पैमाने पर मूंगे की चट्टानें नष्ट हो जाएंगी।

अधिकारियों ने बताया कि बंदरगाह के साथ-साथ एक पूरी तरह से नया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बनाने की भी योजना है, जिसके कम से कम एक रनवे के तीन साल के भीतर चालू होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, बड़े विमानों के लिए जगह बनाने के मकसद से भारतीय नौसेना के केंद्र आईएनएस बाज़ (कैंपबेल बे में स्थित) के मौजूदा रनवे को बढ़ाकर लगभग तीन किलोमीटर किया जा रहा है।

जोशी ने कहा कि ये पहल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आर्थिक और रणनीतिक महत्व को बढ़ाकर ‘विकसित भारत’ के व्यापक दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

उन्होंने द्वीप समूह में समानांतर पहलों की भी जानकारी दी, जिनमें जहाज की मरम्मत की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कौशल विकास और बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ समझौते शामिल हैं।

उप राज्यपाल ने कहा कि इसके अलावा, पोर्ट मीडोज़ (स्वराज द्वीप के पास, जिसे पहले हैवलॉक द्वीप के नाम से जाना जाता था) पर जहाज से जहाज पर माल उतारने एवं लादने के लिए टर्मिनल और डिगलीपुर के पास अटलांटा बे में प्रस्तावित गहरे पानी वाले बहु उद्देश्यीय बंदरगाह जैसी परियोजनाओं से ग्रेट निकोबार परियोजना को मदद मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, ‘‘इन घटनाक्रमों के साथ, अगले पांच वर्षों में अंडमान सागर में जहाजरानी गतिविधियों में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिससे यह क्षेत्र शुरू में जहाज मरम्मत केंद्र और बाद में जहाज निर्माण केंद्र के रूप में विकसित हो सकेगा।’’

अधिकारियों ने बताया कि कई अध्ययन किये जा रहे हैं और आने वाले सालों में इन परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाएगा।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


लेखक के बारे में