ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण में बड़ी सफलता, कच्छ में 10 साल बाद चूजे का जन्म

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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण में बड़ी सफलता, कच्छ में 10 साल बाद चूजे का जन्म

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  • Publish Date - March 28, 2026 / 09:11 PM IST,
    Updated On - March 28, 2026 / 09:11 PM IST

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को बताया कि गुजरात के कच्छ में एक दशक बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) का चूजा जन्मा है। यह उपलब्धि ‘जंपस्टार्ट अप्रोच’ नामक नयी संरक्षण पद्धति के जरिये हासिल की गई है।

मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह पहल पर्यावरण मंत्रालय, राजस्थान और गुजरात के वन विभागों तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान के समन्वय से पूरी की गई।

अधिकारियों के अनुसार, यह देश में पहली अंतरराज्यीय ‘जंपस्टार्ट’ पहल है, जिसे गुजरात में सफलतापूर्वक लागू किया गया। उन्होंने बताया कि कच्छ के घास के मैदानों में फिलहाल केवल तीन मादा जीआईबी ही बची हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से प्रजनन की संभावना बेहद कम हो गई थी।

इस परियोजना के तहत राजस्थान के सम से गुजरात के नलिया तक लगभग 770 किलोमीटर की दूरी तय कर एक निषेचित अंडे को विशेष पोर्टेबल इन्क्यूबेटर में बिना रुके पहुंचाया गया। इसके लिए एक बाधारहित कॉरिडोर तैयार किया गया।

मादा पक्षी ने इस अंडे को सफलतापूर्वक सेया और 26 मार्च को चूजे का जन्म हुआ। परियोजना की टीम के अनुसार, यह चूजा अब अपनी ‘फोस्टर मदर’ के साथ प्राकृतिक आवास में पल रहा है।

मंत्रालय ने बताया कि राजस्थान के सम और रामदेवरा स्थित संरक्षण प्रजनन केंद्रों में जीआईबी की संख्या बढ़कर 73 हो गई है, जिसमें इस प्रजनन सत्र में पांच नए चूजे शामिल हुए हैं।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत अब दीर्घकालिक संरक्षण योजना के तहत इन पक्षियों को प्राकृतिक पर्यावास में पुनः स्थापित (री-वाइल्डिंग) करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

भाषा रवि कांत सुरेश

सुरेश