एफसीआरए विधेयक से अल्पसंख्यक संगठनों, गैर सरकारी संगठनों के अस्तित्व पर संकट : सीबीसीआई

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एफसीआरए विधेयक से अल्पसंख्यक संगठनों, गैर सरकारी संगठनों के अस्तित्व पर संकट : सीबीसीआई

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  • Publish Date - March 28, 2026 / 10:43 PM IST,
    Updated On - March 28, 2026 / 10:43 PM IST

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) ‘कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया’(सीबीसीआई) ने शनिवार को प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) विधेयक, 2026 को लेकर ‘‘गंभीर चिंता’’ व्यक्त करते हुए दावा किया कि यह प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यक और नागरिक समाज संगठनों के ‘‘संचालनात्मक अस्तित्व को खतरे में डाल सकता है’’।

इसके उप महासचिव फादर मैथ्यू कोयिकल ने विधेयक के प्रमुख प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह ‘‘केंद्र सरकार को लाइसेंस नवीनीकरण से इनकार करने और इसके बाद अल्पसंख्यक संगठनों तथा गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की संस्थाओं, निधियों, संपत्तियों और परिसंपत्तियों पर नियंत्रण अपने हाथ में लेने का अधिकार देता है।’’

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को एफसीआरए पंजीकरण रद्द होने और नवीनीकरण में देरी होने मात्र से गैर सरकारी संगठनों या उनके संस्थानों की विदेशी निधियों और परिसंपत्तियों पर नियंत्रण करने का अधिकार देने वाले प्रावधान ‘‘अलोकतांत्रिक, असंवैधानिक और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत’’ है।

कोयिकल ने कहा, ‘‘प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और नागरिक समाज संगठनों के संचालन को खतरे में डालता है, जो आवश्यक सामाजिक, शैक्षिक और धर्मार्थ कार्यों के लिए विदेशी योगदान पर निर्भर हैं।’’

सीबीसीआई ने अधिकारियों को दी जा रही व्यापक शक्तियों को लेकर भी चिंता जताई।

कोयिकल ने कहा, ‘‘इस तरह का नियंत्रण लोकतांत्रिक सिद्धांतों को गंभीर रूप से कमजोर करता है और सार्वजनिक जवाबदेही को भी कमजोर करता है।’’

उन्होंने विधेयक की समीक्षा का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘सीबीसीआई भारत सरकार से प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक में इन प्रावधानों पर पुनर्विचार करने का तत्काल आह्वान करता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम सरकार से आग्रह करते हैं कि विधेयक में एक अपीलीय प्राधिकरण की स्थापना को शामिल किया जाए और संपत्ति के अधिग्रहण से संबंधित सभी विवादास्पद प्रावधानों को तत्काल हटाया जाए, ताकि सभी नागरिकों और अल्पसंख्यकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।’’

वक्फ विधेयक पर सीबीसीआई के रुख के बारे में आई खबरों पर कोयिकल ने स्पष्ट किया कि ‘‘आप रुख की गलत व्याख्या कर रहे हैं; हमने कभी भी उस विधेयक का समर्थन नहीं किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने कहा था कि विधेयक संविधान के दायरे में होना चाहिए। यह संविधान से बाहर नहीं जाना चाहिए।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि, ‘‘केंद्र सरकार जो भी कानून बनाए, उससे किसी भी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए और न ही किसी अल्पसंख्यक के अधिकारों का उल्लंघन होना चाहिए।’’

सरकार ने बुधवार को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन के लिए लोकसभा में जो विधेयक पेश किया था, जिसमें विदेशी वित्त पोषित संगठनों पर निगरानी के साथ यह प्रस्ताव किया गया है कि लाइसेंस गंवाने वाली गैर-लाभकारी संस्थाओं की संपत्तियों को जब्त करने और इनका प्रबंधन करने के लिए एक नया प्राधिकरण बनाया जाएगा।

भाषा

देवेंद्र दिलीप

दिलीप