स्वतंत्रता दिवस ‘एट होम’ कार्यक्रम में महेश्वरी अंगवस्त्र पहनाकर किया जाएगा मेहमानों का स्वागत
स्वतंत्रता दिवस ‘एट होम’ कार्यक्रम में महेश्वरी अंगवस्त्र पहनाकर किया जाएगा मेहमानों का स्वागत
नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित किए जाने वाले ‘एट होम’ समारोह में मेहमानों का स्वागत हाथ से बुना हुआ पारंपरिक महेश्वरी अंगवस्त्र पहनाकर किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
इस बार के ‘निमंत्रण पैकेज’ से जुड़ी सभी चीजें छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सुंदर व पारंपरिक कला से प्रेरित हैं।
राष्ट्रपति की उप प्रेस सचिव नविका गुप्ता ने बताया कि 15 अगस्त को आयोजित स्वागत समारोह में शिरकत करने वाले मेहमानों का यह विशेष अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया जाएगा।
यह अंगवस्त्र मध्य प्रदेश के महेश्वर में महेश्वरी बुनाई की पारंपरिक तकनीक से हाथ से बनाया गया है। इसे रेशम और सूती धागों से बुना गया है। इसमें छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की पारंपरिक बुनाई और वस्त्र कला के अलग-अलग खास डिजाइनों का इस्तेमाल किया गया है।
निमंत्रण पत्र में दिए गए विवरण में कहा गया है कि अंगवस्त्र के डिजाइन में महाराष्ट्र की करवत काठी साड़ी के किनार बॉर्डर, गोवा की कुन्बी साड़ी की रुद्राक्ष बॉर्डर, मध्य प्रदेश की महेश्वरी बुनाई का कांगरा डिज़ाइन और छत्तीसगढ़ की पनिका परंपरा का चिंता चौक डिज़ाइन शामिल किया गया है। इस तरह चार अलग-अलग बुनाई परंपराओं को एक ही कपड़े में एक साथ प्रस्तुत किया गया है।
निमंत्रण में लिखा है, ’15 अगस्त 2026 को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब राष्ट्रपति भवन आपका स्वागत करेगा, तब हम आपको भारत की सांस्कृतिक और कलात्मक विविधता तथा प्रकृति के संरक्षण की हमारी सदियों पुरानी परंपराओं का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते हैं।’
राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस के निमंत्रण में छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की पर्यावरण संरक्षण और हरियाली से जुड़ी अनूठी पहलों को भी प्रदर्शित किया गया है।
इन राज्यों की जीवंत सजीव कला परंपराओं के माध्यम से, यह निमंत्रण समुदायों, रचनात्मकता और संरक्षण के बीच की गहरी परस्पर निर्भरता की एक झलक प्रस्तुत करता है।
बाहरी आवरण (कवर) का डिजाइन तटीय कोंकण क्षेत्र की ‘कावी कला’ से प्रेरित है। पते की पर्ची के साथ लगी हुई लोहे की घंटी को छत्तीसगढ़ के बस्तर के कुशल जनजातीय लोहारों द्वारा रीसाइकिल किए गए कबाड़ लोहे का उपयोग करके हाथ से बनाया गया है।
कपड़े का यह लिफाफा ‘बाग प्रिंट’ का है, जिसकी पहचान हाथ से तराशे गए लकड़ी के ठप्पों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग है। यह शिल्प मध्य प्रदेश के धार जिले के ‘बाग’ कस्बे से आया है और वहीं से इसका नाम पड़ा है।
यह निमंत्रण पैकेज वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन (एनआईडी), अहमदाबाद द्वारा तैयार किया गया है।
भाषा जोहेब पवनेश
पवनेश

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