सजा पूरी कर चुके गुजरात के मछुआरे की पाकिस्तान की जेल में मौत

सजा पूरी कर चुके गुजरात के मछुआरे की पाकिस्तान की जेल में मौत

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  • Publish Date - January 20, 2026 / 04:38 PM IST,
    Updated On - January 20, 2026 / 04:38 PM IST

अहमदाबाद, 20 जनवरी (भाषा) अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा अनजाने में पार करने के बाद 2022 में पाकिस्तानी एजेंसियों द्वारा पकड़े गए गुजरात के एक मछुआरे की 16 जनवरी को कराची की एक जेल में मौत हो गई। एक कार्यकर्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि उसने लगभग तीन साल पहले ही अपनी सजा पूरी ली थी।

मृतक मछुआरे का नाम गोपनीय रखा गया है।

मछुआरा समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले साल 22 दिसंबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर पाकिस्तानी जेलों में बंद ऐसे व्यक्तियों की रिहाई में तेजी लाने का अनुरोध किया था।

शांति कार्यकर्ता जतिन देसाई ने सोमवार को कहा कि मछुआरे की मौत 16 जनवरी को कराची की मालीर जेल में हुई। देसाई पाकिस्तानी जेलों में बंद भारतीय मछुआरों का मुद्दा लगातार उठाते रहे है

‘पोरबंदर बोट एसोसिएशन’ के पूर्व अध्यक्ष जीवन जंगी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मृतक मछुआरा संभवतः गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना का रहने वाला था और पिछले कुछ महीनों से बीमार था।

देसाई ने कहा, “उक्त मछुआरे को 2022 में पकड़ा गया था और उसकी राष्ट्रीयता सत्यापित होने के बाद उसी वर्ष उसकी सजा पूरी हो गई थी। दोनों देशों के बीच 2008 के ‘कांसुलर एक्सेस’ समझौते के बावजूद, सजा पूरी होने और राष्ट्रीयता सत्यापित होने के बाद भी भारतीय मछुआरे पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं।”

‘कांसुलर एक्सेस’ समझौता दो देशों के बीच किया गया वह करार है, जिसके तहत एक देश को दूसरे देश में हिरासत में लिए गए अपने नागरिकों से मिलने, उनकी स्थिति जानने और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का अधिकार मिलता है।

देसाई ने बताया कि पाकिस्तान की जेलों में बंद अधिकतर भारतीय मछुआरे गुजरात, दीव और महाराष्ट्र के हैं।

प्रतिनिधिमंडल द्वारा जयशंकर को लिखे गए पत्र में कहा गया, “दोनों देशों के बीच 2008 में हुए समझौते के बावजूद भारतीय मछुआरे अब भी पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं। सजा पूरी होने के बाद भी उन्हें हिरासत में रखे जाने के कारण उनके परिवारों का वर्षों से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे वे गहरे मानसिक संकट से गुजर रहे हैं। इसके अलावा जेलों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं। हम आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि कृपया इस मामले पर ध्यान दें और उनकी रिहाई तथा वतन वापसी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।”

देसाई ने बताया कि फिलहाल कराची की जेलों में 198 भारतीय मछुआरे बंद हैं, जिनमें 19 महाराष्ट्र से हैं। इनमें से लगभग 160 मछुआरे अपनी सजा पूरी कर चुके हैं और उनकी राष्ट्रीयता का सत्यापन भी हो चुका है।

भाषा प्रचेता मनीषा

मनीषा