शिक्षकों से मारपीट का मामला: अदालत ने मुंबई की महापौर रितू तावडे की याचिका खारिज की

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शिक्षकों से मारपीट का मामला: अदालत ने मुंबई की महापौर रितू तावडे की याचिका खारिज की

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  • Publish Date - March 18, 2026 / 01:01 PM IST,
    Updated On - March 18, 2026 / 01:01 PM IST

मुंबई, 18 मार्च (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने 2016 में दो स्कूल शिक्षकों के साथ मारपीट के मामले में शहर की महापौर रितू तावडे को आरोपमुक्त करने से इनकार करते हुए कहा कि पीड़ितों के बयान उनके खिलाफ ‘‘आरोप तय करने’’ के लिए पर्याप्त हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वाई. पी. मनाठकर ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा कि अन्य गवाहों ने भी कहा है कि तावडे ने शिक्षकों के साथ मारपीट की थी।

यह घटना 29 जुलाई 2016 को वाकोला इलाके में नगर निकाय के उर्दू माध्यम के एक स्कूल में हुई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, विवाद कथित रूप से कैंसर से जूझ रही एक महिला शिक्षक के ‘‘अचानक तबादले’’ को लेकर शुरू हुआ था।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि तावडे छह अन्य लोगों के साथ स्कूल में कथित तौर पर दाखिल हुईं और कैंसर से पीड़ित होने के बावजूद उस शिक्षिका के तबादले को लेकर प्रबंधन के साथ तीखी बहस की।

पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने प्रबंधन के खिलाफ अपशब्द कहने शुरू कर दिए और दो स्कूल शिक्षकों के साथ मारपीट की।

इस मामले में 11 अगस्त, 2016 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी और बचाव पक्ष ने इसमें 13 दिन की देरी पर सवाल उठा थे।

तावडे ने अपनी अर्जी में दावा किया कि घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी ‘‘संयोगवश’’ थी और इस घटना से उनका ‘‘कोई संबंध नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नगरसेविका के रूप में उनकी स्थिति का ‘‘शिकायतकर्ता (स्कूल की प्रधानाध्यापिका) ने अनुचित प्रचार पाने के लिए’’ दुरुपयोग किया है।

महापौर ने कहा, ‘‘आवेदक की राजनीतिक पहचान के बारे में पता चलने पर शिकायतकर्ता ने दुर्भावना और गुप्त इरादों के साथ कदम उठाते हुए अपनी निजी शिकायत को बल देने के लिए आवेदक (तावडे) को गलत तरीके से इसमें फंसाया।’’

पुलिस की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक इकबाल सोलकर ने दलील दी कि पीड़ितों के बयान से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि तावडे ने दोनों शिक्षकों को थप्पड़ मारा था।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि स्कूल वह जगह होती है जहां विद्यार्थियों को जीवन के सबक मिलते हैं लेकिन उसी जगह यह झगड़ा हुआ, इसलिए इस कृत्य को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद न्यायाधीश ने कहा,‘‘पीड़ितों ने उस व्यक्ति के रूप में स्पष्ट रूप से आवेदक का नाम लिया है जिसने स्कूल के भीतर उन्हें मारा।’’

अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि अन्य गवाहों ने भी कहा है कि तावडे ने शिक्षकों के साथ मारपीट की थी।

भाषा सिम्मी शोभना

शोभना