संसदीय समिति ने एनडीआरएफ के लिए अतिरिक्त बटालियन की कमी पर चिंता जताई

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संसदीय समिति ने एनडीआरएफ के लिए अतिरिक्त बटालियन की कमी पर चिंता जताई

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  • Publish Date - March 18, 2026 / 12:48 PM IST,
    Updated On - March 18, 2026 / 12:48 PM IST

नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) संसद की एक स्थायी समिति ने इस बात पर चिंता जाहिर की है कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की परिचालन जिम्मेदारियां बढ़ने के बावजूद पिछले तीन वर्षों में इसके लिए कोई अतिरिक्त बटालियन नहीं खड़ी की गई।

संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत रिपोर्ट में, गृह मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति ने आपदा प्रतिक्रिया में एनडीआरएफ की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की और अतिरिक्त कर्मियों के लिए आवश्यक वित्तपोषण सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया।

भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति ने बल की विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में आपदा प्रबंधन में निभाई गई भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता अभियानों में इसके योगदान की भी प्रशंसा की।

समिति ने 2026-27 की अनुदान मांगों पर अपनी 257वीं रिपोर्ट में कहा ‘‘ बढ़ती परिचालन जिम्मेदारियों के बावजूद पिछले तीन वर्षों में एनडीआरएफ के लिए कोई अतिरिक्त बटालियन नहीं खड़ी की गई है और तैनात बल (14,837) स्वीकृत बल (18,581) से काफी कम है ।’’

समिति ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से कहा कि वह मानव संसाधन में अंतर का मूल्यांकन करे और रिक्तियों को भरने के उपाय तेज करे ताकि परिचालन तत्परता सुनिश्चित की जा सके।

रिपोर्ट में समिति ने कहा कि नियुक्ति की शर्तों में संशोधन किया जा सकता है ताकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के अधिक कर्मी एनडीआरएफ में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित हों।

समिति ने आगाह किया कि ऐसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए धन की कमी एनडीआरएफ के कामकाज को प्रभावित कर सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘समिति सिफारिश करती है कि आवश्यकता पड़ने पर गृह मंत्रालय समीक्षा के बाद किए गए आकलन (आरई) चरण में वित्त मंत्रालय से अतिरिक्त निधि प्राप्त करने का प्रयास करे, ताकि आपात स्थितियों में संचालन दक्षता और तत्परता से समझौता न हो।’’

इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि बजट अनुमान 2026–27 में कुल आवंटन का केवल लगभग 10 प्रतिशत पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है ‘‘प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता को देखते हुए, समिति सिफारिश करती है कि पूंजीगत संपत्तियों, उन्नत बचाव उपकरण, आईसीटी-समर्थित प्रतिक्रिया प्रणाली और क्षेत्रीय अवसंरचना को मजबूत करने पर अधिक जोर दिया जाए ताकि प्रतिक्रिया समय कम हो और आपदा तैयारी बढ़े।’’

भाषा मनीषा माधव

माधव