गांधीनगर, 18 मार्च (भाषा) गुजरात सरकार ने बुधवार को ‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ विधेयक विधानसभा में पेश किया, जिसका उद्देश्य धर्म, जाति या पंथ की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और सहजीवन संबंध से संबंधित कानूनों को विनियमित करना है।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने यह विधेयक पेश किया।
राज्य द्वारा नियुक्त समिति ने एक दिन पहले ही राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन पर अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंपी थी।
उम्मीद है कि इस विधेयक पर बजट सत्र के अंतिम दिन यानी 25 मार्च को चर्चा और अनुमोदन के लिए विचार किया जाएगा।
‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ नामक प्रस्तावित कानून पूरे राज्य में लागू होगा और गुजरात की सीमा से बाहर रहने वाले निवासी भी इसके दायरे में होंगे।
हालांकि, विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए गए विधेयक के दस्तावेज में कहा गया है कि यह अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा, जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत संरक्षित हैं।
इसमें कहा गया है, ‘‘वर्तमान विधेयक धर्म, जाति, पंथ या लैंगिक भेदभाव के बिना राज्य के सभी नागरिकों के लिए नागरिक मामलों को नियंत्रित करने वाला एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करके इन सिफारिशों को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य धर्मनिरपेक्षता, लैंगिक न्याय और सामाजिक सुधार के सिद्धांतों को कायम रखना है, जिससे समाज की एकता एवं अखंडता मजबूत हो सके।’’
इस विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में वैध विवाह के लिए शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिनमें द्विविवाह पर प्रतिबंध, पुरुषों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित करना शामिल है।
भाषा शफीक सुरेश
सुरेश