जयपुर बुकमार्क 2027 में गुजराती साहित्य रहेगा केंद्र में

जयपुर बुकमार्क 2027 में गुजराती साहित्य रहेगा केंद्र में

जयपुर बुकमार्क 2027 में गुजराती साहित्य रहेगा केंद्र में
Modified Date: September 22, 2026 / 04:32 pm IST
Published Date: September 22, 2026 4:32 pm IST

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) दक्षिण एशिया का एक बड़ा प्रकाशन मंच जयपुर बुकमार्क (जेबीएम) 14वें संस्करण के साथ वापसी कर रहा है और इसका आयोजन जयपुर साहित्योत्सव (जेएलएफ) के साथ ही 14 जनवरी, 2027 को किया जाएगा।

आयोजकों ने मंगलवार को यहां जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी देते हुए बताया कि जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में होने वाले 2027 के इस संस्करण में भारत और विदेशों से प्रकाशक, संपादक, साहित्य एजेंट, लेखक, अनुवादक, किताबों के विक्रेता, इलस्ट्रेटर और प्रकाशन उद्योग से जुड़े अन्य पेशेवर एक साथ आएंगे।

इस बार इस समारोह में गुजराती साहित्य, अनुवाद, कहानी कहने के नए तरीकों, प्रकाशन में नवोन्मेष और तथा पुस्तक उद्योग पर तकनीक एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते असर पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

विज्ञप्ति के अनुसार, एक अहम पहल ‘इंडिया-यूके पब्लिशिंग फ़ेलोशिप’ को जारी रखना होगा। यह ब्रिटिश काउंसिल के साथ मिलकर चलाया जाने वाला एक संयुक्त कार्यक्रम है, जिसका मकसद भारत और ब्रिटेन के स्वतंत्र प्रकाशकों के बीच पेशेवर आदान प्रदान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

इस फेलोशिप के तहत, एक खुली प्रक्रिया के ज़रिए दो स्वतंत्र प्रकाशकों – एक भारत से और एक ब्रिटेन से – को चुना जाएगा। ये प्रकाशक जयपुर बुकमार्क 2027 और लंदन बुक फ़ेयर 2027 में खास तौर पर तैयार किए गए प्रोग्राम में हिस्सा लेंगे।

चुने गए फ़ेलो 14-18 जनवरी तक जयपुर बुकमार्क में और उसके बाद 16-18 मार्च तक लंदन पुस्तक मेले में शामिल होंगे।

इस फ़ेलोशिप का मकसद दोनों बाजारों में पेशेवर विकास, उद्योग से जुड़ने और प्रकाशन समुदाय के साथ बातचीत करने के मौके देना होगा।

जेएलएफ की सह संस्थापक और सह निदेशक नमिता गोखले ने एक बयान में कहा, “जयपुर बुकमार्क हमेशा से उन कई आवाज़ों, भाषाओं और विचारों के लिए एक मिलन स्थल रहा है जो प्रकाशन की दुनिया को आकार देते हैं।”

उन्होंने कहा, “इंडिया-यूके पब्लिशिंग फेलोशिप अलग-अलग महाद्वीपों के स्वतंत्र प्रकाशकों को एक साथ लाकर इन संबंधों को मज़बूत करती है। इससे बातचीत, सहयोग और विचारों व कहानियों के लेन-देन के मौके बनते हैं।”

विज्ञप्ति के अनुसार, आगामी सत्र में गुजराती साहित्य पर भी खास ज़ोर रहेगा और इसके लेखकों, प्रकाशकों, अनुवादकों और साहित्यिक परंपराओं को बड़े प्रकाशन जगत के साथ बातचीत के लिए एक मंच देगा।

इसमें गुजराती प्रकाशन और अनुवाद की भूमिका पर भी चर्चा होगी कि कैसे ये साहित्य को नई भाषाओं और बाजारों तक पहुंचाने में मदद करते हैं।

जेबीएम ने 2014 में शुरुआत के बाद से, लगभग 37 देशों के प्रकाशन पेशेवरों और प्रतिभागियों की मेजबानी की है।

जेबीएम 18 जनवरी, 2027 को खत्म होगा।

भाषा नरेश प्रशांत

प्रशांत


लेखक के बारे में