बारिश में गुरुग्राम जैसी स्थिति इसलिए बनती है क्योंकि बुनियादी ढांचे में निवेश नहीं हुआ : न्यायालय

बारिश में गुरुग्राम जैसी स्थिति इसलिए बनती है क्योंकि बुनियादी ढांचे में निवेश नहीं हुआ : न्यायालय

बारिश में गुरुग्राम जैसी स्थिति इसलिए बनती है क्योंकि बुनियादी ढांचे में निवेश नहीं हुआ : न्यायालय
Modified Date: September 22, 2026 / 07:58 pm IST
Published Date: September 22, 2026 7:58 pm IST

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि बारिश के दौरान हरियाणा के गुरुग्राम में व्यवस्था इसलिए चरमरा जाती है क्योंकि जल निकासी और सीवेज प्रणाली जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में निवेश नहीं किया गया।

शीर्ष अदालत ने इसके विपरीत उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां स्थिति अलग है क्योंकि उसे अगले 30-40 वर्षों को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया गया है।

न्यायालय ने ये टिप्पणियां कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं, जिसमें राज्य सरकार की प्रीमियम फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) योजना को बरकरार रखा गया था।

प्रीमियम एफएआर योजना के तहत संपत्ति मालिक निर्धारित प्रीमियम शुल्क का भुगतान कर सामान्य रूप से अनुमत एफएआर से अधिक निर्माण अधिकार खरीद सकते हैं। इसका उद्देश्य ऊंची इमारतों के निर्माण को बढ़ावा देना और शहरी स्थानीय निकायों के लिए राजस्व जुटाना है।

एफएआर का अर्थ किसी भवन के कुल फर्श क्षेत्र (सकल फर्श क्षेत्र) और उस भूखंड के क्षेत्रफल के बीच का अनुपात है जिस पर भवन बनाया गया है।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने याचिकाकर्ता ‘सिटीजन्स एक्शन फोरम’ की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि अतिरिक्त एफएआर का इस्तेमाल अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

गैर सरकारी संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सोंधी ने दलील दी कि प्रीमियम एफएआर देने के लिए सड़क की चौड़ाई को प्रभावी रूप से एकमात्र मानदंड बना दिया गया है, जिससे बेंगलुरु में पहले से दबाव झेल रहे पार्किंग, पानी, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचे पर पर्याप्त विचार किए बिना बड़े पैमाने पर अतिरिक्त निर्माण की अनुमति मिल रही है।

न्यायमूर्ति बागची ने विभिन्न राज्य प्राधिकरणों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत से कहा कि बेंगलुरु में यातायात एक बड़ी समस्या है और यह याचिकाकर्ता की गंभीर चिंता है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, ‘‘टाउनशिप के बुनियादी ढांचे में कोई स्पष्ट सुधार या वृद्धि नजर नहीं आती। ऐसा नहीं है कि नयी सड़कें बनाई गई हैं, नयी सीवर लाइनें डाली गई हैं, नए बस फ्लाईओवर बनाए गए हैं या ऐसी अन्य सुविधाएं बढ़ाई गई हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमने गुरुग्राम में देखा है कि किसी प्राकृतिक आपदा के आने पर यह व्यवस्था कैसे चरमरा जाती है। क्योंकि इस बुनियादी ढांचे में वृद्धि किए बिना आप एक भूखंड पर कई मंजिलों का बोझ डाल रहे हैं।’’

पीठ ने कहा कि ग्रेटर नोएडा में ऐसी समस्या नहीं है क्योंकि उसे अगले 30-40 वर्षों को ध्यान में रखकर योजनाबद्ध किया गया है।

उच्चतम न्यायालय ने बेंगलुरु के अधिकारियों को याचिका पर चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने 15 जून को कर्नाटक सरकार की प्रीमियम एफएआर योजना की संवैधानिक वैधता बरकरार रखते हुए कहा था कि इसे संविधान का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।

उच्च न्यायालय ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें दावा किया गया था कि यह योजना संपत्ति के अधिकारों का उल्लंघन करती है और हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) के मूल्य को कम करती है।

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

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