गुरुग्राम पुलिस ने ठगी करने में शामिल दिल्ली के फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, पांच लोग गिरफ्तार
गुरुग्राम पुलिस ने ठगी करने में शामिल दिल्ली के फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, पांच लोग गिरफ्तार
गुरुग्राम, छह जून (भाषा) गुरुग्राम पुलिस ने दिल्ली के जनकपुरी इलाके से संचालित और क्रेडिट कार्ड घोटाले में कथित तौर पर शामिल एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करके एक महिला सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि ये लोग पिछले पांच महीनों से सक्रिय हैं और हर 10 से 15 दिन में अपना ठिकाना बदलकर पुलिस से बच रहे हैं।
यह मामला 11 मार्च को तब सामने आया जब एक व्यक्ति ने पुलिस थाना साइबर अपराध दक्षिण में शिकायत दर्ज कराई कि क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने का दावा करने वाले धोखेबाजों के ऑनलाइन लिंक के जरिए उससे करीब 28,000 रुपये की ठगी की गई। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने बताया कि सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर) गौरव फोगाट के मार्गदर्शन में निरीक्षक नवीन कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम ने शुक्रवार को जनकपुरी स्थित कॉल सेंटर पर छापा मारा और पांच जालसाजों को गिरफ्तार किया।
आरोपियों की पहचान दिल्ली के बलजीत नगर निवासी राहुल (33), दिल्ली के इंदरपुरी निवासी अनुज पाल (20), गौरव (24), मुकुल किरार (22) और तिलक नगर निवासी अंचल (21) के रूप में हुई है।
पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपियों ने क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने का प्रलोभन देकर पीड़ितों को ठगा था।
पुलिस ने बताया कि आरोपी राहुल के निर्देशों पर काम करते थे और अपने काम के लिए वेतन प्राप्त करते थे। राहुल उन्हें ग्राहकों का डेटा उपलब्ध कराता था, जिसके बाद वे लोगों को फोन करके उनके क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का दावा करते थे। फिर वे पीड़ितों को फर्जी लिंक भेजते थे और उनके क्रेडिट कार्ड की जानकारी का इस्तेमाल करके ऑनलाइन सामान खरीदते थे।
पुलिस ने बताया कि ये सामान या तो राहुल को सौंप दिया जाता था या अगर सामान की कीमत पांच हजार रुपये से सात हजार रुपये के बीच होती थी तो उसे बेच दिया जाता था।
एसीपी फोगाट ने कहा, “राहुल जनवरी 2026 से कॉल सेंटर संचालित कर रहा था। धोखाधड़ी करने के बाद, आरोपी दो से तीन दिनों के लिए काम बंद कर देते थे और फिर दोबारा फर्जीवाड़ा शुरू कर देते थे। कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए, वे हर 10-15 दिनों में अपना ठिकाना बदल देते थे। राहुल हर धोखाधड़ी के बाद ग्राहकों का नया डेटा उपलब्ध कराता था। हम आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं।”
भाषा
राखी संतोष
संतोष

Facebook


