केरल में नौकरशाह के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान संदेह के घेरे में थे ज्ञानेश कुमार: इसाक

केरल में नौकरशाह के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान संदेह के घेरे में थे ज्ञानेश कुमार: इसाक

केरल में नौकरशाह के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान संदेह के घेरे में थे ज्ञानेश कुमार: इसाक
Modified Date: September 25, 2026 / 03:15 pm IST
Published Date: September 25, 2026 3:15 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 25 सितंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के वरिष्ठ नेता टी.एम. थॉमस इसाक ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार केरल में एक नौकरशाह के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ‘संदेह के घेरे में’ थे।

इसाक ने यहां पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि केरल कैडर के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार 2006 में वी.एस. अच्युतानंदन के नेतृत्व में वामपंथी सरकार बनने के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव थे।

उन्होंने कहा कि उसी साल नवंबर तक उन्हें इस पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद उनके खिलाफ सतर्कता जांच के आदेश दिए गए थे।

इसाक ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई केरल में विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित सड़क परियोजना से जुड़ी एक मलेशियाई निर्माण कंपनी के निदेशक की आत्महत्या के बाद की गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि निदेशक के सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम था और उसमें उत्पीड़न, रिश्वत की मांग करने और बिलों को लंबित रखने के आरोप लगाए गए थे।

इसाक ने सुसाइट नोट का जिक्र करते हुए आरोप लगाया, ‘उन्होंने उत्पीड़न का जिक्र किया था जिसका उन्हें सामना करना पड़ा था। उन्होंने यह भी कहा था कि रिश्वत मांगी गई थी, बिल रोक कर रखे गए थे और इसी तरह की बातें थीं। वह काफी निराश थे, वह एक बहुत संवेदनशील व्यक्ति थे और उन्होंने आत्महत्या कर ली।’

अच्युतानंदन सरकार में 2006 से 2011 तक वित्त मंत्री रहे इसाक ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को बाद में रक्षा मंत्रालय में नियुक्त कर दिया गया।

निर्वाचन आयोग की ओर से इसाक के इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इसाक ने कहा कि जब 2011 में दूसरी बार यूडीएफ सरकार बनी, तो ज्ञानेश कुमार केरल सदन के रेजिडेंट कमिश्नर बने और 2016 में पिनराई विजयन सरकार बनने तक इस पद पर रहे।

उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार बाद में जम्मू-कश्मीर से संबंधित मामलों से जुड़े और राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के गठन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसाक ने आरोप लगाया कि इसके बाद ज्ञानेश कुमार ने भाजपा नेतृत्व का विश्वास हासिल किया और चुनावों में हेरफेर करने के लिए उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया गया।

भाषा जोहेब नरेश

नरेश


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