कच्चातीवू को श्रीलंका को सौंपना कांग्रेस शासन का एक और ‘ऐतिहासिक काला अध्याय’ : भाजपा

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कच्चातीवू को श्रीलंका को सौंपना कांग्रेस शासन का एक और ‘ऐतिहासिक काला अध्याय’ : भाजपा

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  • Publish Date - June 26, 2026 / 03:36 PM IST,
    Updated On - June 26, 2026 / 03:36 PM IST

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 1974 में श्रीलंका को कच्चातीवू द्वीप सौंपने को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस की आलोचना करते हुए इसे उसके शासनकाल का एक और ‘‘ऐतिहासिक काला अध्याय’’ बताया तथा आरोप लगाया कि ऐसा कर भारत के राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया।

कच्चातीवू, पाक जलडमरूमध्य में एक निर्जन द्वीप है। भारत ने 1974 में इस द्वीप पर श्रीलंका की संप्रभुता को मान्यता दी थी।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘‘कल हमने आपातकाल के दुखद अध्याय को याद किया, और आज ही के दिन कांग्रेस पार्टी के इतिहास में एक और काला अध्याय जुड़ा था।’’

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘1974 में इसी दिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तमिलनाडु के पास स्थित कच्चातीवू को श्रीलंका को सौंप दिया था। इसके परिणामस्वरूप, तमिलनाडु के मछुआरों को लगातार कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।’’

उन्होंने द्वीप पर मौजूद सेंट एंथनी चर्च का भी जिक्र किया और दावा किया कि ‘‘भले ही लोग अपनी नौका पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज लगा रखे हों, लेकिन उन्हें वहां जाने की इजाजत नहीं है।’’

त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का भारत के हितों से ‘‘समझौता’’ करने का लंबा इतिहास रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह सिलसिला 1947 में देश के बंटवारे और मुस्लिम लीग के आगे कांग्रेस के झुकने के साथ शुरू हुआ। इसके बाद 1948 में पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर) को पाकिस्तान को सौंप दिया गया और फिर 1962 में चीन को अक्साई चिन सौंप दिया गया। मानसरोवर के साथ-साथ असम को भी लगभग सौंप ही दिया गया था।’’

कच्चातीवू का हस्तांतरण करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद 26 जून 1974 को कच्चातीवू को सौंप दिया गया और 28 जून को यह श्रीलंका के नियंत्रण में आ गया।’’

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप