Harish Rana Death: “कोई रोना मत…” इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का हुआ अंतिम संस्कार, कार्यक्रम के बीच पिता की ये बात सुन हर कोई हो गया भावुक, देखें वीडियो

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Harish Rana Death: गाजियाबाद: उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए ग्रीन पार्क श्मशान घाट पहुंचाया गया, जहां थोड़ी देर में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

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  • Publish Date - March 25, 2026 / 01:19 PM IST,
    Updated On - March 25, 2026 / 01:49 PM IST

harish rana/ image source: Sachingupta x handle

HIGHLIGHTS
  • 13 साल कोमा में रहे हरीश
  • सुप्रीम कोर्ट ने दी इच्छामृत्यु अनुमति
  • इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा का अंतिम संस्कार

Harish Rana Death: गाजियाबाद: उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए ग्रीन पार्क श्मशान घाट पहुंचाया गया, जहां थोड़ी देर में उनका अंतिम संस्कार किया गया। हरीश राणा ने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में अंतिम सांस ली थी। वे पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को उन्हें इच्छामृत्यु (Euthanasia) की अनुमति दी थी, जिसके बाद यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना रहा। उनके निधन के बाद परिवार और करीबियों में गहरा शोक व्याप्त है।

Harish Rana euthanasia case: पिता अशोक राणा ने बेटे हरीश को किया आखिरी बार प्रणाम

अंतिम संस्कार के दौरान एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला, जब हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने हाथ जोड़कर उपस्थित लोगों से अपील की कि कोई भी रोए नहीं। उन्होंने कहा, “कोई रोना मत, बेटा शांति से जाए, इसलिए प्रार्थना कर रहा हूं। बेटा अब जहां भी जन्म ले, उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” इस दौरान परिवार के सदस्य और अन्य लोग भावुक हो उठे। हरीश के छोटे भाई आशीष ने ग्रीन पार्क श्मशान घाट में उन्हें मुखाग्नि दी, जबकि पिता ने बेटे को अंतिम बार प्रणाम कर विदाई दी।

Ghaziabad man coma 13 years: परिवार ने हरीश के फेफड़े, किडनी, आंखों के कॉर्निया किया दान

मानवता की मिसाल पेश करते हुए हरीश राणा के परिवार ने उनके अंगों का दान भी किया। परिवार ने उनके फेफड़े, किडनी और आंखों के कॉर्निया दान किए, ताकि अन्य लोगों को जीवन मिल सके। 13 वर्षों तक कोमा में रहने के बाद इच्छामृत्यु की अनुमति और फिर अंगदान के इस फैसले ने समाज के सामने एक संवेदनशील और प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।

बता दें कि, भारत में पैसिव यूथेनेशिया (Passive Euthanasia) यानी सम्मानजनक मृत्यु की कानूनी अनुमति पाने वाले पहले मरीज हरीश राणा का मंगलवार को दिल्ली एम्स (AIIMS) में निधन हो गया। 31 वर्षीय हरीश पिछले 13 साल से कोमा में थे। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उन्हें लाइफ सपोर्ट से हटाने की अनुमति दी थी, जिसके बाद एम्स के डॉक्टरों की देखरेख में यह प्रक्रिया पूरी की गई।

2013 से लाइफ सपोर्ट पर थे हरीश

आपको बता दें की साल 2013 में पंजाब यूनिवर्सिटी में बीटेक की पढ़ाई के दौरान हरीश चौथी मंजिल की बालकनी से गिर गए थे। AIIMS Delhi News Today  सिर में गंभीर चोट लगने के कारण वे तब से ही कोमा में थे और केवल पाइप के जरिए ही उन्हें पोषण मिल रहा था और वह उस पर जीवित थे। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने माना कि हरीश का इलाज केवल उनके जैविक अस्तित्व को खींच रहा था, जबकि सुधार की कोई गुंजाइश नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट ने दी परमिशन

कोर्ट ने इसे गरिमा के साथ मरने के अधिकार के तहत पैसिव यूथेनेशिया की मंजूरी दी।14 मार्च को हरीश को गाजियाबाद स्थित उनके घर से एम्स के पल्लिएटिव केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया। डॉ. सीमा मिश्रा के नेतृत्व में गठित एक विशेष मेडिकल टीम ने धीरे-धीरे उनकी पोषण सहायता (Nutritional Support) को वापस लिया, जिसके बाद मंगलवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।हरीश के पिता अशोक राणा ने कहा कि यह फैसला उनके बेटे को सालों की लाइलाज पीड़ा से मुक्ति दिलाकर उसकी गरिमा बहाल करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी हरीश के माता-पिता के असीम धैर्य और प्रेम की सराहना की।

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