हरियाणा: सरकारी अस्पताल में नाबालिग से यौन उत्पीड़न के आरोप में 62 वर्षीय चिकित्सक गिरफ्तार

हरियाणा: सरकारी अस्पताल में नाबालिग से यौन उत्पीड़न के आरोप में 62 वर्षीय चिकित्सक गिरफ्तार

हरियाणा: सरकारी अस्पताल में नाबालिग से यौन उत्पीड़न के आरोप में 62 वर्षीय चिकित्सक गिरफ्तार
Modified Date: June 1, 2026 / 08:25 pm IST
Published Date: June 1, 2026 8:25 pm IST

कुरुक्षेत्र, एक जून (भाषा) हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित लोकनायक जयप्रकाश (एलएनजेपी) जिला नागरिक अस्पताल में एक नाबालिग लड़की का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में 62 वर्षीय एक परामर्शदाता चिकित्सक को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

चिकित्सक को रविवार शाम हिरासत में लिया गया था। सोमवार को उसे अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे तीन जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे मेडिकल जांच के लिए थाने से पैदल ही व्यस्त बाजार से होते हुए पास के अस्पताल ले गई।

हरियाणा राज्य महिला आयोग ने इस कथित घटना का स्वत: संज्ञान लिया है और मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

स्थिति की गंभीरता और प्राथमिकी को देखते हुए हरियाणा सरकार ने रविवार को चिकित्सक की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं।

एलएनजेपी अस्पताल की चिकित्सा अधिकारी डॉ. सारा अग्रवाल ने बताया कि नाबालिग को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत स्थिर है।

कुरुक्षेत्र पुलिस के अनुसार, कुरुक्षेत्र जिले के एक निवासी ने 31 मई को शिकायत दर्ज कराई थी कि 29 मई को वह अपनी बेटी के साथ इलाज के लिए एलएनजेपी अस्पताल गए थे। आरोपी चिकित्सक ने पिता और बेटी दोनों को अलग-अलग वार्ड में भर्ती कर दिया।

शिकायत के मुताबिक, जब पिता 31 मई को अपनी बेटी के वार्ड में गए, तो उसने कथित तौर पर खुलासा किया कि चिकित्सक ने 29 मई को उसका यौन उत्पीड़न किया था।

इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय थाने में चिकित्सक के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की धारा 6 और 10 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान मजिस्ट्रेट के समक्ष नाबालिग का बयान दर्ज किया गया और उसकी चिकित्सकीय जांच कराई गई।

महिला आयोग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जल्द से जल्द कार्रवाई रिपोर्ट भेजने का अनुरोध किया है।

आयोग ने कानून के अनुसार पीड़िता की सुरक्षा, संरक्षण, परामर्श (काउंसलिंग) और पुनर्वास सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव को भेजे पत्र में आयोग ने कहा, ‘चिकित्सा अधिकारी पर लगाए गए आरोप बेहद गंभीर और परेशान करने वाले हैं। यदि यह कथित घटना साबित होती है, तो यह एक नाबालिग लड़की के अधिकारों, गरिमा और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है। यह एक चिकित्सा पेशेवर के पद से जुड़े विश्वास और जिम्मेदारी का घोर दुरुपयोग है।’

आयोग के पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि ऐसी घटनाएं न केवल नाबालिग को कभी न भूलने वाला सदमा देती हैं, बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली में जनता के विश्वास को भी कमजोर करती हैं।

आयोग ने बताया कि उसने इस मामले से जुड़ी खबरों और सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो के आधार पर यह संज्ञान लिया है।

भाषा सुमित माधव

माधव


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