दिल्ली में भीषण गर्मी का प्रकोप, 53.5 डिग्री सेल्सियस तक महसूस की गई तपन
दिल्ली में भीषण गर्मी का प्रकोप, 53.5 डिग्री सेल्सियस तक महसूस की गई तपन
नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में मंगलवार को भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहा और शाम 5:30 बजे लोगों को 53.5 डिग्री सेल्सियस की तपन महसूस हुई।
हालांकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि शहर में लू की स्थिति नहीं बनी है।
दिल्ली की आधार वेधशाला सफदरजंग में अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक है। पालम में अधिकतम तापमान 41.0 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 3.2 डिग्री ज़्यादा) और लोधी रोड पर 40.1 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 3.1 डिग्री ज़्यादा) दर्ज किया गया।
राष्ट्रीय राजधानी के रिज वेधशाला में सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया। यहां पर पारा 41.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 4.8 डिग्री ज़्यादा था जबकि आयानगर में सामान्य से दो डिग्री अधिक 40.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
मौसम विभाग ने बताया कि सफदरजंग, पालम, लोधी रोड और आयानगर में सुबह 8:30 बजे तक हल्की बारिश दर्ज की गई, जबकि रिज में बारिश नहीं हुई। सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच पालम और आयानगर में हल्की बारिश दर्ज की गई, जबकि सफदरजंग, लोधी रोड और रिज शुष्क रहा।
सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री अधिक है। पालम में भी न्यूनतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.4 डिग्री अधि है। लोधी रोड और अयानगर में तापमान क्रमशः 31.2 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 4.2 डिग्री ज़्यादा) और 4.4 डिग्री ज़्यादा दर्ज किया गया, जबकि रिज में न्यूनतम तापमान 29.3 डिग्री सेल्सियस (सामान्य से 3.8 डिग्री ज़्यादा) रहा।
आईएमडी ने कहा, ‘‘अब तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली उपमंडल में केवल एक वेधशाला ही लू की स्थिति तय करती है। आज दिल्ली में लू नहीं चली, क्योंकि इसकी शर्तों को पूरा करने के लिए हरियाणा-चंडीगढ़-दिल्ली उपमंडल में कम से कम दो वेधशालाओं पर ऐसी स्थिति होनी चाहिए।’’
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पाकिस्तान से आने वाली शुष्क पश्चिमी हवाओं के कारण उच्च तापमान बना हुआ है, जबकि अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं भी दिल्ली पहुंच रही हैं और नमी बढ़ा रही हैं।
निजी मौसम विज्ञान सेवा ‘स्काईमेट’ के महेश पलावत ने बताया, ‘‘जब ये शुष्क और नमी वाली हवाएं आपस में मिलती हैं, तो बादल तो बनते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर बारिश के लिए जरूरी नमी नहीं होती। जब तक बादल बनते हैं – आमतौर पर शाम चार या पांच बजे के आसपास – तब तक दिन का अधिकतम तापमान दर्ज हो चुका होता है। यही वजह है कि अधिकतम तापमान और तपन, दोनों ही असामान्य रूप से ज्यादा रहे हैं।’’
भाषा धीरज नरेश
नरेश

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