उच्च न्यायालय वांगचुक को निजी अस्पताल में भर्ती कराने संबंधी याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमत

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उच्च न्यायालय वांगचुक को निजी अस्पताल में भर्ती कराने संबंधी याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमत

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  • Publish Date - July 19, 2026 / 02:28 PM IST,
    Updated On - July 19, 2026 / 02:28 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की उस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें उन्हें सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में ले जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है।

आंग्मो की याचिका पर न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा द्वारा अपराह्न ढाई बजे सुनवाई किये जाने की उम्मीद है।

इससे पहले, आंग्मो ने कहा था कि उनका ‘‘सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं रह गया’’ है और वह वांगचुक की तबीयत और बिगड़ने से पहले उन्हें अपनी पसंद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना चाहती हैं।

आंग्मो ने उच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद सफदरजंग अस्पताल प्रशासन ने उन्हें ‘‘केवल चुनिंदा जानकारी’’ ही उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि वांगचुक को किसी अन्य अस्पताल में ले जाने की अनुमति नहीं दिए जाने के कारण उनके स्वास्थ्य का ‘‘स्वतंत्र रूप से सत्यापन’’ नहीं हो पा रहा है।

अपने पति के स्वास्थ्य को लेकर ‘‘गहरी चिंता’’ व्यक्त करते हुए आंग्मो ने कहा कि जब वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाया गया था, तब उनके सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानक स्थिर थे। इसके बावजूद उनके उपचार की प्रक्रिया ‘‘गुप्त और पूरी तरह अपारदर्शी तरीके’’ से अपनाई गई, जिससे वह व्यथित हैं।’’

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने 16 जुलाई को अधिकारियों को वांगचुक के स्वास्थ्य पर नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया था। यह आदेश एकपक्षीय सुनवाई के बाद पारित किया गया था। इसके बावजूद, पुलिस शनिवार को इस आदेश का ‘‘अनुचित लाभ’’ उठाते हुए वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले गई।

याचिका में कहा गया है, ‘‘ऐसी कोई चिकित्सकीय आपात स्थिति या अन्य परिस्थिति नहीं थी, जो इस तरह के अचानक और जबरन हस्तक्षेप को उचित ठहराए। वांगचुक को बलपूर्वक हटाना न तो चिकित्सकीय रूप से आवश्यक था और न ही कानूनी रूप से उचित। यह सोनम वांगचुक के मौलिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।’’

यह याचिका अधिवक्ता बहुली शर्मा, सुजैन मारिया मैथ्यू, रिद्धि अरोड़ा, सूर्यांश किशन राजदान और योषित जैन के माध्यम से दायर की गई है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि सफदरजंग अस्पताल और ‘‘याचिकाकर्ता के अनुरोध पर एक स्वतंत्र एजेंसी’’ द्वारा करायी गयी जांच में वांगचुक के पोटेशियम स्तर को लेकर ‘‘विसंगति’’ पायी गयी।

याचिका में कहा गया है, ‘‘प्रतिवादियों ने शनिवार को करीब साढ़े 10 घंटे की अस्पष्ट देरी के बाद रात साढ़े 10 बजे रक्त का नमूना याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराया। याचिकाकर्ता की आशंका के अनुरूप, इन नमूनों की जांच के परिणाम में पोटेशियम का स्तर 3.6 मिलीग्राम पाया गया, जो पहले बताए गए 2.9 मिलीग्राम से काफी अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रतिवादियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जांच की रिपोर्ट और याचिकाकर्ता के अनुरोध पर स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में महत्वपूर्ण अंतर है। इससे प्रतिवादियों की दुर्भावनापूर्ण मंशा जाहिर होती है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘इसलिए याचिकाकर्ता इस माननीय न्यायालय से अनुरोध करने को विवश हैं कि पिछले 20 दिनों से सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की जांच कर रहे चिकित्सकों और उनके वकील को उनसे निर्बाध रूप से मिलने की अनुमति देने, उन्हें याचिकाकर्ता की पसंद के अस्पताल में भेजने, याचिकाकर्ता और/या सोनम वांगचुक की पसंद के चिकित्सकों एवं जांच केंद्रों से स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच और उपचार कराने की अनुमति देने तथा प्रतिवादियों को निर्देश देने का आदेश दिया जाए कि वे वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से तत्काल छुट्टी दें।’’

आंग्मो ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि किसी भी परिवार को अपने प्रियजन का इलाज किस अस्पताल में कराना है, यह तय करने के लिए प्रशासन से संघर्ष करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सफदरजंग अस्पताल द्वारा जारी स्वास्थ्य बुलेटिन में वांगचुक के पोटेशियम स्तर के वास्तविक आंकड़े को ‘‘छोड़ दिया गया’’ है।

उन्होंने कहा, ‘‘बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अस्पताल उन्हें छुट्टी देने या हमारी पसंद के किसी निजी अस्पताल में ले जाने की अनुमति नहीं दे रहा है। अस्पताल भवन के जिस मंजिल पर हम हैं वहां लगभग 30 पुलिसकर्मी तैनात हैं और पूरे अस्पताल में 100 से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद हैं। हमारी आवाजाही पर कड़ी पाबंदी है। यह चिकित्सकीय देखभाल नहीं, बल्कि अवैध हिरासत है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैंने उच्च न्यायालय का रुख किया और आज तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है, ताकि सोनम वांगचुक की तबीयत और बिगड़ने से पहले उन्हें दूसरे अस्पताल में ले जाने की अनुमति मिल सके।’’

वांगचुक को शनिवार को उनकी भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस जबरन सफदरजंग अस्पताल ले गई थी।

उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में जारी प्रदर्शन के समर्थन में 28 जून को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।

भाषा

गोला सुभाष

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